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	<description>Latest Hindi News &#38; Information Portal</description>
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		<title>वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2025–26 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया; एआई-आधारित परिवर्तन, सुदृढ़ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को किया और मजबूत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 11:27:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुंबई, जुलाई 2026:&#160;एचडीएफसी बैंक ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष 2025–26 के लिए अपने सशक्त वित्तीय एवं परिचालन प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद बैंक ने उल्लेखनीय लचीलापन प्रदर्शित किया है। सुदृढ़ व्यवसायिक वृद्धि, अनुशासित जोखिम प्रबंधन, तीव्र डिजिटल परिवर्तन तथा उत्कृष्ट कॉर्पोरेट गवर्नेंस के &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुंबई, जुलाई 2026:</strong>&nbsp;एचडीएफसी बैंक ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष 2025–26 के लिए अपने सशक्त वित्तीय एवं परिचालन प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद बैंक ने उल्लेखनीय लचीलापन प्रदर्शित किया है। सुदृढ़ व्यवसायिक वृद्धि, अनुशासित जोखिम प्रबंधन, तीव्र डिजिटल परिवर्तन तथा उत्कृष्ट कॉर्पोरेट गवर्नेंस के बल पर बैंक ने देश के अग्रणी निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में व्यवधान तथा ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सर्वाधिक तीव्र गति से विकसित होने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनी रही। इस अनुकूल आर्थिक परिदृश्य का लाभ उठाते हुए एचडीएफसी बैंक ने अपनी सभी प्रमुख व्यावसायिक गतिविधियों में संतुलित एवं स्वस्थ वृद्धि दर्ज की तथा अपनी पारंपरिक मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) को भी बनाए रखा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान बैंक की&nbsp;<strong>अग्रिम राशि (Advances)</strong>&nbsp;में&nbsp;<strong>12.1 प्रतिशत</strong>&nbsp;की वृद्धि होकर यह&nbsp;<strong>₹29.37 लाख करोड़</strong>&nbsp;पर पहुँच गई, जबकि&nbsp;<strong>जमा (Deposits)</strong>&nbsp;में&nbsp;<strong>14.4 प्रतिशत</strong>&nbsp;की वृद्धि के साथ यह&nbsp;<strong>₹31.05 लाख करोड़</strong>&nbsp;हो गई, जो बैंकिंग प्रणाली की औसत जमा वृद्धि से अधिक रही। बैंक की&nbsp;<strong>शुद्ध आय (Net Revenue)</strong>&nbsp;बढ़कर&nbsp;<strong>₹1,91,219 करोड़</strong>&nbsp;हो गई तथा&nbsp;<strong>कर पश्चात लाभ (Profit After Tax)</strong>&nbsp;में&nbsp;<strong>10.9 प्रतिशत</strong>&nbsp;की वृद्धि दर्ज करते हुए यह&nbsp;<strong>₹74,671 करोड़</strong>&nbsp;पर पहुँच गया। बैंक का कुल&nbsp;<strong>बैलेंस शीट आकार</strong>&nbsp;<strong>11.6 प्रतिशत</strong>&nbsp;बढ़कर&nbsp;<strong>₹43.65 लाख करोड़</strong>&nbsp;हो गया, जो ग्राहकों के बढ़ते विश्वास और सतत व्यवसायिक विकास का प्रमाण है। निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025–26 के लिए&nbsp;<strong>₹13 प्रति इक्विटी शेयर</strong>&nbsp;के अंतिम लाभांश (Final Dividend) की अनुशंसा की है। इससे विशेष अंतरिम लाभांश सहित कुल लाभांश&nbsp;<strong>₹15.50 प्रति शेयर</strong>&nbsp;हो जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर&nbsp;<strong>एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शशिधर जगदीशन</strong>&nbsp;ने कहा,</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8220;भारत दीर्घकालिक विकास की एक सशक्त और स्थायी कहानी बना हुआ है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत व्यापक आर्थिक आधार, नीतिगत स्थिरता और आंतरिक मांग के बल पर उल्लेखनीय लचीलापन प्रदर्शित किया है। एचडीएफसी बैंक ने भी विवेकपूर्ण जोखिम प्रबंधन, ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण तथा सतत मूल्य सृजन की अपनी प्रतिबद्धता के साथ सभी प्रमुख मानकों पर स्वस्थ विकास दर्ज किया है।&#8221;</strong></p>
</blockquote>



<p class="wp-block-paragraph">बैंक ने एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय के बाद उत्पन्न समन्वय (Merger Synergies) को भी निरंतर सुदृढ़ किया है। विलय के तीन वर्ष पूर्ण होने के बाद बैंक ने आवास वित्त (Housing Finance) क्षेत्र में अपनी नेतृत्वकारी स्थिति को और मजबूत किया है तथा बैंकिंग, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट एवं अन्य वित्तीय सेवाओं के व्यापक पोर्टफोलियो के माध्यम से ग्राहकों के साथ अपने संबंधों को और गहरा किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वित्त वर्ष के दौरान&nbsp;<strong>कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)</strong>&nbsp;एवं प्रौद्योगिकी बैंक की परिवर्तनकारी रणनीति के प्रमुख आधार रहे। बैंक ने अपने स्वदेश विकसित एंटरप्राइज एआई प्लेटफ़ॉर्म&nbsp;<strong>‘नीव (Neev)’</strong>&nbsp;के माध्यम से ग्राहक सेवा, रिटेल ऋण, ट्रेड ऑपरेशंस तथा आंतरिक कार्यक्षमता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एआई का व्यापक उपयोग बढ़ाया। साथ ही नई पीढ़ी के नेटबैंकिंग एवं मोबाइल बैंकिंग प्लेटफ़ॉर्म, डिजिटल भुगतान सेवाओं,&nbsp;<strong>PayZapp</strong>,&nbsp;<strong>Pixel Credit Card</strong>,&nbsp;<strong>SmartWealth</strong>, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर तथा गुवाहाटी स्थित नए टेक्नोलॉजी एवं डिजिटल सेंटर में किए गए निवेशों ने ग्राहक अनुभव, परिचालन दक्षता और विस्तार क्षमता को नई मजबूती प्रदान की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">श्री जगदीशन ने आगे कहा,</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8220;हमारी रणनीति एआई को एक अलग तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि बैंक की प्रत्येक प्रणाली और कार्यप्रवाह का अभिन्न हिस्सा बनाने की है। प्रौद्योगिकी आज ग्राहकों को अधिक सरल, सुरक्षित और तेज़ बैंकिंग अनुभव उपलब्ध कराने के साथ-साथ हमारी उत्पादकता बढ़ाने तथा जिम्मेदार नवाचार को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।&#8221;</strong></p>
</blockquote>



<p class="wp-block-paragraph">बैंक ने वर्ष के दौरान अपनी&nbsp;<strong>साइबर सुरक्षा व्यवस्था</strong>&nbsp;को भी और अधिक सुदृढ़ बनाया। उन्नत निगरानी प्रणालियों, एआई-सक्षम साइबर खतरा पहचान (Threat Detection), आधुनिकीकृत सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर तथा साइबर धोखाधड़ी के प्रति ग्राहकों को जागरूक करने वाले लोकप्रिय&nbsp;<strong>&#8216;विजिल आंटी&#8217; (Vigil Aunty)</strong>&nbsp;अभियान के माध्यम से बैंक ने सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल बैंकिंग वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कॉर्पोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में भी बैंक ने सर्वोच्च मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पूर्व अंशकालिक अध्यक्ष&nbsp;<strong>श्री अतनु चक्रवर्ती</strong>&nbsp;के इस्तीफे के बाद निदेशक मंडल ने त्वरित निर्णय लेते हुए&nbsp;<strong>श्री केकी एम. मिस्त्री</strong>&nbsp;को अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त किया। इसके पश्चात नियामकीय एवं शेयरधारकों की स्वीकृति के अधीन&nbsp;<strong>श्री राजीव कुमार</strong>&nbsp;को अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त किया गया। हितधारकों के विश्वास को और मजबूत करने के उद्देश्य से निदेशक मंडल ने देशी एवं अंतरराष्ट्रीय विधि विशेषज्ञों से स्वतंत्र समीक्षा कराई, जिसमें इस्तीफे में व्यक्त की गई आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं पाया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर&nbsp;<strong>एचडीएफसी बैंक के अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष श्री केकी एम. मिस्त्री</strong>&nbsp;ने कहा,</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8220;एचडीएफसी बैंक विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर दृढ़तापूर्वक आधारित है। हमारी सुदृढ़ गवर्नेंस व्यवस्था, अनुशासित निर्णय प्रक्रिया और दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण हमें विकास और नवाचार के अगले चरण की ओर आत्मविश्वास के साथ अग्रसर कर रहे हैं।&#8221;</strong></p>
</blockquote>



<p class="wp-block-paragraph">वित्त वर्ष के दौरान बैंक की प्रमुख सहायक कंपनी&nbsp;<strong>एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड</strong>&nbsp;का सफल सूचीबद्ध होना (Listing) भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, जिसने एचडीएफसी बैंक समूह को एक विविधीकृत वित्तीय सेवा समूह के रूप में और अधिक सशक्त बनाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">व्यावसायिक उपलब्धियों के साथ-साथ बैंक ने अपने प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम&nbsp;<strong>&#8216;परिवर्तन&#8217;</strong>&nbsp;के माध्यम से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी निरंतर आगे बढ़ाया है। इस पहल के अंतर्गत अब तक&nbsp;<strong>10.7 करोड़ से अधिक लोगों</strong>&nbsp;के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कार्यक्रम का विस्तार देश के&nbsp;<strong>28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों</strong>&nbsp;के&nbsp;<strong>11,000 से अधिक गांवों</strong>, जिनमें&nbsp;<strong>498 सीमावर्ती गांव</strong>&nbsp;भी शामिल हैं, तक हो चुका है। इसके माध्यम से ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वित्तीय समावेशन एवं सतत अवसंरचना विकास को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भविष्य की ओर देखते हुए एचडीएफसी बैंक ने भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है। अनुकूल जनसांख्यिकीय संरचना, नीतिगत निरंतरता, तीव्र डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति तथा प्रौद्योगिकी में सतत निवेश के बल पर बैंक लाभकारी विकास, उत्कृष्ट ग्राहक अनुभव तथा सभी हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन के अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।</p>
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		<title>भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की आधारशिला : अशोक गांगुली</title>
		<link>https://divyaindianews.com/News_id/42585</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 17:34:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[टॉप न्यूज़]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय शिक्षा दिवस पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय विमर्श में पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण एवं समग्र व्यक्तित्व विकास पर हुआ गहन मंथन लखनऊ, 2 जुलाई 2026।भारतीय शिक्षा दिवस (स्थापना दिवस) के अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत, एकम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या एवं कबीर शान्ति मिशन के संयुक्त तत्वावधान में &#8220;पंचकोष आधारित &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारतीय शिक्षा दिवस पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय विमर्श में</strong><strong> </strong><strong>पंचकोष</strong><strong> </strong><strong>आधारित चरित्र निर्माण एवं समग्र व्यक्तित्व विकास पर हुआ गहन मंथन</strong><strong></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ, 2 जुलाई 2026।</strong><br>भारतीय शिक्षा दिवस (स्थापना दिवस) के अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत, एकम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या एवं कबीर शान्ति मिशन के संयुक्त तत्वावधान में &#8220;पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास : भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में&#8221; विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन गोमती नगर स्थित श्री राकेश कुमार मित्तल सभागार, स्मृति भवन में सम्पन्न हुआ।<br><br>कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म एवं समाज जीवन से जुड़े शिक्षाविदों, लोक सेवकों, विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा प्रबुद्ध नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।<br><br>कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। <strong>त्रिवेणी कला संगम, अवध की सुश्री नितिका शर्मा</strong> एवं उनकी टीम ने मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर भारतीय सांस्कृतिक चेतना का भावपूर्ण वातावरण निर्मित किया। इसके उपरांत भाग्य मंदिर की साधिका<strong> श्रीमती रजनी शुक्ला</strong> एवं उनकी टीम द्वारा पंचकोष आधारित ध्यान एवं नाम-संकीर्तन कराया गया, जिससे पूरा सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।<br><br>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि <strong>पूर्व प्रमुख सचिव (राज्यपाल) श्री जी. बी. पटनायक</strong> ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि संस्कारित, उत्तरदायी, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने भारतीय जीवन-मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया।<br><br>मुख्य वक्ता एवं <strong>सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक गांगुली</strong> ने कहा कि &#8220;भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला है। नई शिक्षा व्यवस्था तभी सार्थक होगी, जब उसमें भारतीय चिंतन, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण को केंद्र में रखा जाएगा।&#8221; उन्होंने पंचकोष आधारित शिक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रभावी एवं वैज्ञानिक आधार बताया।<br><br><strong>शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के केंद्रीय अधिकारी, राजस्थान क्षेत्र सह संयोजक एवं विशिष्ट अतिथि श्री नितिन कासलीवाल</strong> ने देशभर में चल रहे भारतीय शिक्षा जागरण अभियान की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकसित भारत के निर्माण में भारतीय शिक्षा दर्शन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।<br><br><strong>शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत के प्रांत संयोजक श्री प्रमिल द्विवेदी</strong> ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भारतीय शिक्षा दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा दर्शन को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का राष्ट्रीय जन-अभियान है। उन्होंने न्यास द्वारा शिक्षा, संस्कृति एवं चरित्र निर्माण के क्षेत्र में संचालित विविध गतिविधियों का भी परिचय कराया।<br><br><strong>प्रख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. मत्स्येंद्र प्रभाकर</strong> ने पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण की अवधारणा को भारतीय चिंतन की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।<br><br><strong>न्यास की चरित्र निर्माण टोली के सदस्य श्री चिंतामणि कौशिक</strong> ने पंचकोष आधारित व्यक्तित्व विकास की व्यवहारिक कार्ययोजना प्रस्तुत की।<br><br>वहीं <strong>कनाडा से अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. अमरेश श्रीवास्तव</strong> का विशेष ऑडियो संदेश भी प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने मनोमय कोष एवं न्यूरोसाइंस के संबंध को सरल एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्पष्ट किया।<br><br>ए<strong>कम नॉलेज फाउंडेशन, अयोध्या के श्री उत्पल मिश्र</strong> ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा के प्रसार में सामाजिक संस्थाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।<br><br>कार्यक्रम के समापन पर आयोजित संवाद एवं प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।<br><br>धन्यवाद ज्ञापन कबीर शान्ति मिशन के मुख्य समन्वयक श्री राजेश अग्रवाल ने प्रस्तुत किया।<br>राष्ट्रीय विमर्श का संचालन श्री व्रत देव पाण्डेय ने प्रभावशाली एवं गरिमामय ढंग से किया।<br><br>यह राष्ट्रीय विमर्श भारतीय शिक्षा के मूल स्वरूप, पंचकोष आधारित व्यक्तित्व विकास, मूल्यपरक शिक्षा तथा विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुआ।<br><br>कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों ने भारतीय शिक्षा दर्शन को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।<br></p>
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		<title>आईएमए लखनऊ में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस समारोह का भव्य आयोजन</title>
		<link>https://divyaindianews.com/News_id/42579</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 09:15:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[टॉप न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 3 जुलाई 2026। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ शाखा द्वारा आईएमए भवन, लखनऊ में एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र, सामाजिक सेवा और आईएमए गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कुल 96 चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में समाज में डॉक्टरों की &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ, 3 जुलाई 2026</strong><em>।</em> राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ शाखा द्वारा आईएमए भवन, लखनऊ में एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र, सामाजिक सेवा और आईएमए गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कुल 96 चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में समाज में डॉक्टरों की भूमिका, सेवा भावना और स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती पर विशेष चर्चा हुई।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-42583" srcset="https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-1024x682.jpeg 1024w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-300x200.jpeg 300w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-768x512.jpeg 768w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कार्यक्रम में <em>माननीय उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, श्री बृजेश पाठक जी</em> </strong>मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में माननीय डॉ. नीरज बोरा जी, विधायक, लखनऊ उत्तर, उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">माननीय श्री बृजेश पाठक जी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर समाज के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं। चिकित्सक न केवल मरीजों का उपचार करते हैं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में समाज को भरोसा और जीवन की नई आशा भी देते हैं। उन्होंने आईएमए लखनऊ द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार और चिकित्सा जगत के बेहतर समन्वय से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाया जा सकता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="682" src="https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-1-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-42582" srcset="https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-1-1024x682.jpeg 1024w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-1-300x200.jpeg 300w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-1-768x512.jpeg 768w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-1.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>माननीय डॉ. नीरज बोरा </strong>जी ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस डॉक्टरों के समर्पण, अनुशासन और सेवा भाव को सम्मान देने का अवसर है। कोविड काल से लेकर सामान्य दिनों तक डॉक्टरों ने जिस निष्ठा से समाज की सेवा की है, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने आईएमए लखनऊ के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सक समुदाय को नई ऊर्जा देते हैं। डॉ. नीरज बोरा जी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डॉ. पवन कुमार, डीजी हेल्थ एवं महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य</strong>, की ओर से कहा गया कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर समाज के जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के उपचार में विशेष संवेदनशीलता रखें। जहां संभव हो, गरीब मरीजों को जांच, पैथोलॉजी, परामर्श और इलाज में सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि उन्हें समय पर उचित उपचार मिल सके। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि वे अपनी सेवा भावना के अनुरूप गरीब मरीजों की सहायता के लिए आगे आएं और दवाओं व उपचार में यथासंभव सहयोग करें।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="682" src="https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-2-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-42581" srcset="https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-2-1024x682.jpeg 1024w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-2-300x200.jpeg 300w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-2-768x512.jpeg 768w, https://divyaindianews.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-02-at-15.37.08-2.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आईएमए लखनऊ की सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव</strong> ने कहा कि डॉक्टरों का जीवन सेवा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का जीवन है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि आईएमए लखनऊ के लिए यह गर्व का विषय है कि इस अवसर पर 96 अवार्डी डॉक्टर्स को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने माननीय उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक जी का राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस समारोह का आमंत्रण स्वीकार करने के लिए विशेष धन्यवाद किया। साथ ही उन्होंने सभी वरिष्ठ चिकित्सकों, सदस्यों, अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आईएमए लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार अस्थाना</strong> ने अपने संबोधन में कहा कि आईएमए हमेशा चिकित्सकों के सम्मान, अधिकार और समाज के प्रति उनके योगदान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आईएमए लखनऊ आने वाले समय में भी स्वास्थ्य जागरूकता, जनहित कार्यक्रमों और चिकित्सक समुदाय के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इस अवसर पर सम्मानित किए गए चिकित्सकों में डॉ. एम.एल. टंडन, डॉ. जी.एम. लाल, डॉ. ए.एन. बाला, डॉ. राम कपूर, कर्नल डॉ. एस.के. शर्मा, डॉ. एन.बी. सिंह, डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. अतुल रस्तोगी, डॉ. अनूप बाजपेयी, डॉ. विवेक सक्सेना, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, डॉ. संदीप कपूर, डॉ. हर्ष वर्धन, डॉ. अजय सिंह, डॉ. मनोज कुमार अस्थाना, डॉ. श्वेता श्रीवास्तव, डॉ. आर.बी. सिंह, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. नीरज टंडन, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. अर्चिका गुप्ता, डॉ. संजय सक्सेना, डॉ. अमित मदान, डॉ. शश्वत सक्सेना, डॉ. आशुतोष शर्मा, डॉ. नईम अहमद, डॉ. तन्वी शर्मा, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ मोना, डॉ. निरुपमा पांडेय, डॉ. ओ.पी. तिवारी, डॉ. सुनीता तिवारी, डॉ. बी.एन. गुप्ता, डॉ. जी.पी. कौशल, डॉ. सुरेश तलवार, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. श्रद्धा सिंह, डॉ. रुखसाना खान, डॉ. विजय कुमार, डॉ. सूर्यकांत, डॉ. जी.पी. सिंह, डॉ. पी.के. गुप्ता, डॉ. रमा श्रीवास्तव, डॉ. मनीष टंडन, डॉ. विनीता मित्तल, डॉ. अजय तिवारी, डॉ. के.पी. चंद्रा, डॉ. दीपक दीवान, डॉ. इमरान अख्तर, डॉ. अरुण पांडेय, डॉ. जी.पी. गुप्ता, डॉ. अभिषेक शुक्ला, डॉ. सुजाता देव, डॉ. एस.पी. जैसवार, डॉ. मृदुल महरोत्रा, डॉ. अलका जैन, डॉ. विजय शंकर निगम, डॉ. अश्वनी कुमार मिश्रा, डॉ. संजीव अवस्थी, डॉ. रत्ना पांडेय, डॉ. सुनीता चंद्रा, डॉ. वरदा मनमीत, डॉ. सीमा तिवारी, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. रोमा, डॉ. निशि टंडन, डॉ. अम्लांशु, डॉ. शारस्वती, डॉ. दीपाली श्रीवास्तव, डॉ. राजीव सक्सेना, डॉ. शेतांशु श्रीवास्तव, डॉ. ऋतु सक्सेना, डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी, डॉ. गुरमीत, डॉ. प्रांजल अग्रवाल, डॉ. आलोक महेश्वरी, डॉ. शिल्पी महेश्वरी, डॉ. सीमा सिंह, डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी, डॉ. हरिओम गुप्ता, डॉ. मधुसूदन मिश्रा, डॉ. पीयूष कुमार, डॉ. सुमित महाराज, डॉ. शश्वत विद्याधर, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. आलोक दीक्षित, डॉ. शशांक निगम, डॉ. सागर, डॉ. स्वाति पाठक, डॉ. रजनीश श्रीवास्तव, डॉ. राहुल शर्मा और डॉ. मानसी ढींगरा शामिल रहे।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किए गए सभी चिकित्सकों को उपस्थित अतिथियों ने बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य तथा निरंतर सेवा कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। अंत में सभी उपस्थित अतिथियों, चिकित्सकों, आईएमए सदस्यों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।</p>
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		<title>एचडीएफसी बैंक ने पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया</title>
		<link>https://divyaindianews.com/News_id/42576</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 09:07:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[टॉप न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[HDFC BANK]]></category>
		<category><![CDATA[hdfc bank latest news]]></category>
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		<category><![CDATA[rajiv Kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वे अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन केकी मिस्त्री की जगह लेंगे,&#160;जिन्हें पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के नैतिक कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफ़ा देने के बाद यह ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ी थी। मुंबई: एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने सोमवार (29 जून, 2026) को हुई बैठक में, पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को 30 जून, 2026 से चार साल की अवधि के लिए &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>वे अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन केकी मिस्त्री की जगह लेंगे</strong><strong>,&nbsp;</strong><strong>जिन्हें पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के नैतिक कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफ़ा देने के बाद यह ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ी थी।</strong><strong></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुंबई: </strong>एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने सोमवार (29 जून, 2026) को हुई बैठक में, पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को 30 जून, 2026 से चार साल की अवधि के लिए बैंक का अतिरिक्त निदेशक (स्वतंत्र निदेशक) नियुक्त करने की मंज़ूरी दी। यह फ़ैसला गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमिटी की सिफ़ारिश पर लिया गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर यह नियुक्ति बैंक के शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी पर निर्भर है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वे अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन केकी मिस्त्री की जगह लेंगे,&nbsp;जिन्हें पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के नैतिक कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफ़ा देने के बाद यह ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ी थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोर्ड ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI)&nbsp;की मंज़ूरी मिलने पर,&nbsp;बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन के तौर पर राजीव कुमार की नियुक्ति और उनके वेतन को भी मंज़ूरी दी। यह नियुक्ति&nbsp;RBI&nbsp;द्वारा मंज़ूर की गई तारीख से&nbsp;3 (तीन) साल की अवधि के लिए होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैंक ने कहा, &#8220;इस बात की पुष्टि की जा रही है कि&nbsp;SEBI&nbsp;या किसी अन्य ऐसी अथॉरिटी के किसी आदेश के तहत राजीव कुमार को डायरेक्टर का पद संभालने से नहीं रोका गया है।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैंक ने एक रेगुलर फाइलिंग में कहा, &#8220;ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए,&nbsp;बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने उस मीटिंग में बैंक के सदस्यों की&nbsp;32वीं सालाना आम बैठक (AGM)&nbsp;बुलाने के लिए संशोधित नोटिस को भी मंज़ूरी दी। यह बैठक बुधवार, 5&nbsp;अगस्त, 2026&nbsp;को होनी है और इसमें ऊपर बताई गई नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल किए गए हैं।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">66&nbsp;वर्षीय श्री कुमार&nbsp;1984&nbsp;बैच के पूर्व&nbsp;IAS&nbsp;अधिकारी हैं। वे फरवरी&nbsp;2020&nbsp;में भारत के वित्त सचिव के पद से रिटायर हुए। रिटायरमेंट के बाद,&nbsp;श्री कुमार ने कुछ समय के लिए पब्लिक एंटरप्राइजेज सिलेक्शन बोर्ड (PESB)&nbsp;के चेयरमैन के तौर पर भी काम किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वित्तीय सेवा विभाग (2017-2020)&nbsp;के सचिव के तौर पर,&nbsp;उन्होंने ऐसे समय में पद संभाला जब सरकारी बैंक कई चुनौतियों से जूझ रहे थे। इनमें शामिल थीं: बड़ी मात्रा में अनरिकॉग्नाइज़्ड&nbsp;NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां),&nbsp;पूंजी की कमी,&nbsp;नए लोन न मिल पाना, &#8216;गोल्ड प्लेटिंग&#8217; (लोन की रकम का गलत इस्तेमाल) का बड़े पैमाने पर होना,&nbsp;नए लोन लेने के लिए इक्विटी और कर्ज का गलत तरीके से इस्तेमाल और घुमाव,&nbsp;बड़े कंसोर्टियम से जुड़ी गवर्नेंस की चुनौतियां,&nbsp;नोटबंदी के बाद माइक्रो-क्रेडिट की कमी को पूरा करने में&nbsp;NBFCs&nbsp;का संघर्ष,&nbsp;और लोगों को ठगने वाली पोंज़ी स्कीमें वगैरह।</p>
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		<title>इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ शाखा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:12:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>“स्वस्थ चिकित्सक, स्वस्थ समाज”: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आईएमए लखनऊ का सामूहिक योगाभ्यास लखनऊ&#160;।&#160;अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ शाखा द्वारा आईएमए भवन, लखनऊ में योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आईएमए लखनऊ के चिकित्सकों एवं सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर प्रयाग आरोग्यम् केंद्र, योग प्रशिक्षण &#8230;</p>
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<h2 class="wp-block-heading"><strong>“स्वस्थ चिकित्सक, स्वस्थ समाज”: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आईएमए लखनऊ का सामूहिक योगाभ्यास</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>।</strong>&nbsp;अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ शाखा द्वारा आईएमए भवन, लखनऊ में योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आईएमए लखनऊ के चिकित्सकों एवं सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर प्रयाग आरोग्यम् केंद्र, योग प्रशिक्षण एवं योगाभ्यास केंद्र, की योग गुरु ज्योति यादव जी ने सभी प्रतिभागियों को लगभग एक घंटे तक योगाभ्यास कराया। उन्होंने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अभ्यास करवाए। साथ ही उन्होंने नियमित योग को स्वस्थ जीवनशैली, तनाव नियंत्रण और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यक्रम में मुख्य रूप से आईएमए लखनऊ की सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष डॉ. रुक्साना मैम, डॉ. नीरज टंडन, डॉ. सरस्वती, डॉ. शाश्वत सक्सेना, डॉ. निरुपमा सहित कई अन्य चिकित्सकों एवं सदस्यों ने सहभागिता की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर आईएमए लखनऊ की सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की निरंतर प्रक्रिया है। आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में चिकित्सकों के लिए भी योग अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ चिकित्सक ही समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और सही प्रेरणा दे सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान से शरीर स्वस्थ रहता है, मन शांत होता है और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। आईएमए लखनऊ का उद्देश्य है कि चिकित्सक स्वयं स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और समाज को भी योग, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या के लिए प्रेरित करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने योग गुरु ज्योति यादव जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में सभी प्रतिभागियों ने सरल और उपयोगी योगाभ्यास किया। उन्होंने सभी चिकित्सकों और सदस्यों से अपील की कि वे योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आईएमए लखनऊ शाखा ने इस अवसर पर संदेश दिया कि चिकित्सक समाज को स्वस्थ रहने की प्रेरणा देने के साथ-साथ स्वयं भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लें। योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।</p>
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		<item>
		<title>शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास अवध प्रांत की प्रांतीय बैठक संपन्न।</title>
		<link>https://divyaindianews.com/News_id/42569</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:08:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>2 जुलाई को भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाएगा न्यास का स्थापना दिवस। &#160;लखनऊ, 20 जून 2026&#160;: शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत की प्रांतीय बैठक का आयोजन आज ज्ञान गुरुकुलम परिसर, इंसाफ नगर, इंदिरा नगर, लखनऊ में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं वैदिक ऋचाओं &#8230;</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://divyaindianews.com/News_id/42569">शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास अवध प्रांत की प्रांतीय बैठक संपन्न।</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://divyaindianews.com">Divya India News</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<ul class="wp-block-list">
<li><strong>2 जुलाई को भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाएगा न्यास का स्थापना दिवस।</strong></li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;</strong><strong>लखनऊ, 20 जून 2026</strong>&nbsp;: शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत की प्रांतीय बैठक का आयोजन आज ज्ञान गुरुकुलम परिसर, इंसाफ नगर, इंदिरा नगर, लखनऊ में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं वैदिक ऋचाओं के उच्चारण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता जी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री ज्ञान पाण्डेय ने प्रस्तुत किया। कल्याण मंत्र के साथ बैठक का समापन हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक को संबोधित करते हुए &nbsp;<strong>अवध प्रांत संयोजक श्री प्रमिल द्विवेदी</strong>&nbsp;&nbsp;ने विभिन्न जनपदों से पधारे कार्यकर्ताओं का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रख्यात शिक्षाविद् मा. अतुल कोठारी जी के मार्गदर्शन में 29 से 31 मई 2026 तक पुणे स्थित श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी (एस.एन.डी.टी.) महिला विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय प्रांत संयोजक बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रम में देशभर के प्रांतों में संगठनात्मक बैठकों एवं प्रेस वार्ताओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में अवध प्रांत की यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि &#8220;विकसित भारत @2047 हेतु शिक्षा&#8221; के संकल्प को साकार करने के लिए न्यास द्वारा पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषा मंच तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 जैसे विषयों पर व्यापक कार्य किया जा रहा है। इन विषयों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने की आवश्यकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">श्री द्विवेदी ने संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में कहा कि समाज जीवन में पंच परिवर्तन(सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य) के विचार को व्यवहार में उतारना समय की मांग है। उन्होंने संगठन की कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि &#8220;कार्यकर्ता विद्वान बने और विद्वान कार्यकर्ता बने&#8221;— यही न्यास की मूल भावना है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास के लिए जीवन की आध्यात्मिक दृष्टि का विकास आवश्यक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का स्थापना दिवस आगामी 2 जुलाई को &#8220;भारतीय शिक्षा दिवस&#8221; के रूप में पूरे अवध प्रांत में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर भारतीय शिक्षा की गौरवशाली परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय भाषाओं के संवर्धन तथा मूल्यपरक शिक्षा के प्रसार को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में अवध प्रांत के सह संयोजक डॉ कीर्ति विक्रम सिंह उपस्थित रहे तथा विभिन्न जनपदों से आए कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों की जानकारी दी तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। सभी उपस्थित कार्यकर्ताओं ने संगठन विस्तार, भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार तथा समाज में शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण को स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;</strong><strong>न्यास का परिचय:</strong><strong>&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत एक राष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2007 में हुई। न्यास का उद्देश्य भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था का निर्माण तथा शिक्षा के भारतीयकरण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">न्यास के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास, मूल्यपरक शिक्षा, वैदिक गणित, पर्यावरण शिक्षा, शिक्षा में स्वायत्तता, प्रबंधन शिक्षा, इतिहास की भारतीय दृष्टि, तकनीकी शिक्षा एवं शिक्षक शिक्षा प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त प्रतियोगी परीक्षा एवं शोध प्रकल्प, भारतीय भाषा अभियान, भारतीय भाषा मंच, शिक्षा स्वास्थ्य न्यास, प्रकाशन, प्रचार-प्रसार तथा महिला कार्य जैसे विविध आयामों एवं विभागों के माध्यम से न्यास देशभर में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।</p>
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		<title>आरबीआई एमपीसी की नीति पर टिप्पणी &#8211; साक्षी गुप्ता, प्रधान अर्थशास्त्री, एचडीएफसी बैंक</title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 09:32:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आरबीआई और सरकार ने आज रुपये पर दबाव कम करने के लिए भारतीय परिसंपत्तियों में पूंजी प्रवाह को बढ़ाने की दिशा में किए गए समन्वित प्रयास को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।&#160;इन उपायों में अल्पकालिक समाधानों के साथ-साथ व्यापक संरचनात्मक सुधार भी शामिल थे,&#160;जैसे कि जी-सेक में एफपीआई निवेश पर कराधान में परिवर्तन।&#160;इन सभी के संयुक्त प्रभाव &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">आरबीआई और सरकार ने आज रुपये पर दबाव कम करने के लिए भारतीय परिसंपत्तियों में पूंजी प्रवाह को बढ़ाने की दिशा में किए गए समन्वित प्रयास को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।&nbsp;इन उपायों में अल्पकालिक समाधानों के साथ-साथ व्यापक संरचनात्मक सुधार भी शामिल थे,&nbsp;जैसे कि जी-सेक में एफपीआई निवेश पर कराधान में परिवर्तन।&nbsp;इन सभी के संयुक्त प्रभाव से वित्त वर्ष&nbsp;2027&nbsp;के लिए अनुमानित&nbsp;40-50&nbsp;अरब डॉलर के भुगतान संतुलन के अंतर को पाटने में मदद मिल सकती है।&nbsp;हमें आने वाले महीनों में रुपये के मूल्य में वृद्धि की संभावना दिख रही है क्योंकि इन उपायों के कारण वास्तविक धन प्रवाह धीरे-धीरे शुरू हो जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस नीतिगत घोषणा में विकास और मुद्रास्फीति के आकलन भी उल्लेखनीय थे।&nbsp;केंद्रीय बैंक ने आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मूल्य दबाव में वृद्धि के कारण विकास के लिए संभावित जोखिमों को पहचाना।&nbsp;साथ ही,&nbsp;वित्त वर्ष&nbsp;2027&nbsp;के लिए मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में&nbsp;50&nbsp;बीपीएस की वृद्धि करके इसे&nbsp;5.1%&nbsp;कर दिए जाने को देखते हुए,&nbsp;इस नीति को थोड़ा आक्रामक माना जा सकता है।&nbsp;इससे अक्टूबर की नीति के साथ ब्याज दर में वृद्धि का चक्र शुरू होने की संभावना बढ़ जाती है। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष&nbsp;2027&nbsp;में कुल मिलाकर&nbsp;50&nbsp;बीपीएस की ब्याज दर वृद्धि होगी।</p>
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		<title>एचडीएफसी बैंक का &#8216;परिवर्तन&#8217; कार्यक्रम पूरे उत्तर भारत में 3.26 लाख एकड़ से ज़्यादा खेत को पराली जलाने से बचाने में बना मददगार</title>
		<link>https://divyaindianews.com/News_id/42564</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 09:31:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[टॉप न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[HDFC BANK]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8211;&#160;&#160;पंजाब&#160;और&#160;हरियाणा&#160;के&#160;380&#160;गांवों&#160;के&#160;86,000&#160;किसान&#160;इस&#160;पहल&#160;में&#160;हुए&#160;शामिल मुंबई,4 जून,2026:  विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, एचडीएफसी बैंक ने अपने  सीएसआर कार्यक्रम &#8216;परिवर्तन&#8217; के ज़रिए, सीआईआई  फाउंडेशन के साथ मिलकर, अपनी &#8216;फसल अवशेष प्रबंधन&#8217; (सीआरएम) पहल में एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की। 2025 के सीज़न में, पंजाब और हरियाणा के कुल 3,78,425 एकड़ खेतों में से 88 फ़ीसदी खेतों को पराली जलाने से बचाया गया। पंजाब के लुधियाना और संगरूर ज़िलों, और हरियाणा के फतेहाबाद ज़िले के 380 से ज़्यादा गांवों के 86,000 किसानों तक पहुँचने वाला यह कार्यक्रम, उत्तर भारत में खेती से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए निजी क्षेत्र की एक व्यापक और असरदार कोशिश है। &#160; &#160; &#160;धान&#160;की&#160;कटाई&#160;के&#160;बाद&#160;पराली&#160;जलाना,&#160;उस&#160;गंभीर&#160;वायु&#160;प्रदूषण&#160;के&#160;मुख्य&#160;कारणों&#160;में&#160;से&#160;एक&#160;है&#160;जो&#160;हर&#160;सर्दियों&#160;में&#160;पूरे&#160;उत्तर&#160;भारत&#160;को&#160;अपनी&#160;चपेट&#160;में&#160;ले&#160;लेता&#160;है।&#160;इससे&#160;आम&#160;जनजीवन&#160;अस्त-व्यस्त&#160;हो&#160;जाता&#160;है&#160;और&#160;दिल&#160;व&#160;फेफड़ों&#160;की&#160;पुरानी&#160;बीमारियाँ&#160;और&#160;भी&#160;बढ़&#160;जाती&#160;हैं।&#160;लगभग&#160;1/3&#160;एकड़&#160;खेत&#160;में&#160;पैदा&#160;होने&#160;वाली&#160;एक&#160;टन&#160;धान&#160;की&#160;पराली&#160;को&#160;जलाने&#160;से&#160;वातावरण&#160;में&#160;तीन&#160;किलोग्राम&#160;&#8216;पार्टिकुलेट&#160;मैटर&#8217; (बारीक&#160;कण)&#160;घुल&#160;जाते&#160;हैं,&#160;साथ&#160;ही&#160;ज़मीन&#160;से&#160;ज़रूरी&#160;पोषक&#160;तत्व&#160;भी&#160;खत्म&#160;हो&#160;जाते&#160;हैं।&#160;2025&#160;में&#160;पंजाब&#160;और&#160;हरियाणा&#160;में&#160;पराली&#160;जलाने&#160;की&#160;घटनाओं&#160;में&#160;53&#160;फीसदी&#160;की&#160;कमी&#160;आने&#160;के&#160;बावजूद,&#160;छोटे&#160;और&#160;सीमांत&#160;किसानों&#160;को&#160;आज&#160;भी&#160;मशीनें&#160;हासिल&#160;करने&#160;और&#160;दो&#160;फसलों&#160;के&#160;बीच&#160;के&#160;कम&#160;समय&#160;में&#160;फसल&#160;के&#160;अवशेषों&#160;का&#160;प्रबंधन&#160;करने&#160;में&#160;कई&#160;मुश्किलों&#160;का&#160;सामना&#160;करना&#160;पड़&#160;रहा&#160;है। &#160; &#160; &#160;अक्टूबर&#160;2023&#160;में&#160;लुधियाना&#160;में&#160;शुरू&#160;हुआ&#160;और&#160;2024&#160;में&#160;संगरूर&#160;और&#160;फतेहाबाद&#160;तक&#160;फैला,&#160;यह&#160;तीन&#160;साल&#160;का&#160;कार्यक्रम&#160;सीआईआई&#160;फाउंडेशन&#160;द्वारा&#160;380&#160;गांवों&#160;में&#160;लागू&#160;किया&#160;जा&#160;रहा&#160;है।&#160;अब&#160;तक, 8&#160;गांवों&#160;ने&#160;पराली&#160;जलाने&#160;की&#160;प्रथा&#160;को&#160;पूरी&#160;तरह&#160;से&#160;खत्म&#160;कर&#160;दिया&#160;है,&#160;और&#160;174&#160;गांवों&#160;ने&#160;90&#160;फीसदी&#160;से&#160;अधिक&#160;&#8216;बिना&#160;जलाए&#8217; (&#160;नॉन&#160;बर्निंग)&#160;नियमों&#160;का&#160;पालन&#160;किया&#160;है। &#160; &#160; &#160;एचडीएफसी&#160;बैंक&#160;की&#160;सीएसआर&#160;&#160;प्रमुख&#160;नुसरत&#160;पठान&#160;ने&#160;इस&#160;उपलब्धि&#160;के&#160;बारे&#160;में&#160;बात&#160;करते&#160;हुए&#160;कहा,&#160;“पराली&#160;जलाना&#160;सिर्फ़&#160;एक&#160;कृषि&#160;आदत&#160;नहीं&#160;है,&#160;यह&#160;एक&#160;व्यवस्थागत&#160;चुनौती&#160;है&#160;जिसकी&#160;जड़ें&#160;अर्थव्यवस्था,&#160;पहुंच&#160;और&#160;जागरूकता&#160;में&#160;हैं।&#160;एचडीएफसी&#160;बैंक&#160;परिवर्तन&#160;की&#160;सीआईइई&#160;फाउंडेशन&#160;के&#160;साथ&#160;साझेदारी&#160;ने&#160;इन&#160;तीनों&#160;पहलुओं&#160;को&#160;एक&#160;साथ&#160;संबोधित&#160;किया&#160;है।&#160;सहकारी&#160;टूल&#160;बैंकों&#160;के&#160;माध्यम&#160;से&#160;किसानों&#160;तक&#160;मशीनरी&#160;की&#160;पहुंच&#160;बनाकर,&#160;लगातार&#160;सामुदायिक&#160;जुड़ाव&#160;के&#160;ज़रिए&#160;व्यवहार&#160;में&#160;बदलाव&#160;लाकर,&#160;और&#160;बायोगैस&#160;व&#160;कम्पोस्टिंग&#160;जैसे&#160;&#8216;एक्स-सीटू&#8217; (खेत&#160;के&#160;बाहर)&#160;समाधान&#160;पेश&#160;करके,&#160;हमने&#160;एक&#160;ऐसा&#160;मॉडल&#160;तैयार&#160;किया&#160;है&#160;जो&#160;किसानों&#160;के&#160;लिए&#160;वास्तविक&#160;बचत&#160;के&#160;साथ-साथ&#160;पर्यावरणीय&#160;परिणाम&#160;भी&#160;देता&#160;है।&#160;विश्व&#160;पर्यावरण&#160;दिवस&#160;के&#160;अवसर&#160;पर,&#160;हम&#160;इस&#160;प्रभाव&#160;को&#160;और&#160;आगे&#160;बढ़ाने&#160;की&#160;अपनी&#160;प्रतिबद्धता&#160;को&#160;दोहराते&#160;हैं।” &#160; &#160; &#160;इस&#160;कार्यक्रम&#160;की&#160;सफलता&#160;का&#160;आधार&#160;&#8216;सामुदायिक&#160;टूल&#160;बैंक&#8217;&#160;का&#160;दृष्टिकोण&#160; 450&#160;से&#160;अधिक&#160;कृषि&#160;मशीनें&#160;है&#160;जिनमें&#160;खरीदी&#160;गईं&#160;बेलर,&#160;सुपर&#160;सीडर,&#160;स्मार्ट&#160;सीडर&#160;और&#160;मित्र&#160;सीडर&#160;शामिल&#160;हैं&#160;&#160;और&#160;140&#160;से&#160;अधिक&#160;किसान&#160;सहकारी&#160;समितियों&#160;तथा&#160;किसान&#160;उत्पादक&#160;संगठनों&#160;(एफपीओज़)&#160;को&#160;दान&#160;की&#160;गईं,&#160;जिससे&#160;ये&#160;मशीनें&#160;किसानों&#160;को&#160;किफायती&#160;किराए&#160;पर&#160;उपलब्ध&#160;हो&#160;सकीं।&#160;पराली&#160;जलाने&#160;के&#160;सबसे&#160;ज़्यादा&#160;समय&#160;के&#160;दौरान,&#160;छोटे&#160;और&#160;सीमांत&#160;किसानों&#160;के&#160;लिए&#160;किराए&#160;पर&#160;800&#160;ट्रैक्टर&#160;उपलब्ध&#160;कराए&#160;गए।&#160;मशीनरी&#160;के&#160;उपयोग&#160;से&#160;&#8216;इन-सीटू&#8217; (खेत&#160;में&#160;ही)&#160;अवशेष&#160;प्रबंधन,&#160;मल्चिंग&#160;और&#160;धान&#160;की&#160;पराली&#160;को&#160;मिट्टी&#160;में&#160;मिलाने&#160;का&#160;काम&#160;संभव&#160;हो&#160;पाता&#160;है;&#160;साथ&#160;ही,&#160;मिट्टी&#160;तैयार&#160;करने,&#160;गेहूं&#160;के&#160;बीज&#160;बोने&#160;और&#160;खाद&#160;डालने&#160;का&#160;काम&#160;भी&#160;एक&#160;ही&#160;बार&#160;में&#160;पूरा&#160;हो&#160;जाता&#160;है।&#160;इससे&#160;पराली&#160;प्रबंधन&#160;और&#160;बुवाई&#160;की&#160;लागत&#160;2,000–2,500&#160;रुपए&#160;प्रति&#160;एकड़&#160;से&#160;घटकर&#160;लगभग&#160;800–1,200&#160;रुपए&#160;प्रति&#160;एकड़&#160;रह&#160;जाती&#160;है,&#160;और&#160;साथ&#160;ही&#160;लंबे&#160;समय&#160;में&#160;मिट्टी&#160;की&#160;उर्वरता&#160;में&#160;सुधार&#160;होता&#160;है&#160;और&#160;रासायनिक&#160;खादों&#160;पर&#160;निर्भरता&#160;कम&#160;होती&#160;है।&#160;जो&#160;किसान&#160;&#8216;इन-सीटू&#8217; (खेत&#160;में&#160;ही)&#160;पराली&#160;प्रबंधन&#160;के&#160;तरीके&#160;नहीं&#160;अपना&#160;पाते,&#160;वे&#160;बेलर&#160;मशीनों&#160;का&#160;उपयोग&#160;करके&#160;पराली&#160;को&#160;मशीनी&#160;तरीके&#160;से&#160;जल्दी&#160;से&#160;इकट्ठा&#160;कर&#160;सकते&#160;हैं,&#160;उसकी&#160;गठरियां&#160;बना&#160;सकते&#160;हैं&#160;और&#160;उसका&#160;निपटान&#160;कर&#160;सकते&#160;हैं।&#160;30&#160;से&#160;अधिक&#160;ग्रामीण&#160;युवाओं&#160;को&#160;मार्गदर्शन&#160;दिया&#160;गया&#160;और&#160;बेलर&#160;मशीनें&#160;उपलब्ध&#160;कराकर&#160;उनका&#160;सहयोग&#160;किया&#160;गया,&#160;ताकि&#160;वे&#160;धान&#160;की&#160;पराली&#160;इकट्ठा&#160;करने,&#160;आपूर्ति&#160;श्रृंखला&#160;प्रबंधन&#160;और&#160;&#8216;मूल्य&#160;संवर्धन&#8217; (वैल्यू&#160;एडिशन)&#160;के&#160;क्षेत्र&#160;में&#160;अपने&#160;छोटे&#160;व्यवसाय&#160;शुरू&#160;कर&#160;सकें।&#160;इस&#160;कार्यक्रम&#160;के&#160;तहत,&#160;खेत&#160;के&#160;बाहर&#160;(एक्स-&#160;सीटू)&#160;पराली&#160;प्रबंधन&#160;को&#160;बेहतर&#160;बनाने&#160;के&#160;लिए&#160;धान&#160;की&#160;पराली&#160;पर&#160;आधारित&#160;18&#160;छोटे&#160;बायोगैस&#160;संयंत्र&#160;स्थापित&#160;किए&#160;गए&#160;हैं&#160;और&#160;दो&#160;बायो-पेलेटाइजेशन&#160;संयंत्र&#160;तथा&#160;एक&#160;जैव-उर्वरक&#160;संयंत्र&#160;स्थापित&#160;किए&#160;जा&#160;रहे&#160;हैं। &#160; &#160; &#160;हज़ारों&#160;गाँव-स्तर&#160;की&#160;बैठकों,&#160;किसानों&#160;के&#160;लिए&#160;जागरूकता&#160;सत्रों&#160;और&#160;कृषि&#160;विभाग&#160;के&#160;साथ&#160;साझेदारी&#160;में&#160;आयोजित&#160;प्रशिक्षण&#160;कार्यक्रमों&#160;के&#160;ज़रिए&#160;किसानों&#160;की&#160;भागीदारी&#160;और&#160;उनके&#160;व्यवहार&#160;में&#160;स्थायी&#160;बदलाव&#160;लाया&#160;गया&#160;है। &#160; &#160; &#160;सीआईआई&#160;फाउंडेशन&#160;में&#160;क्लाइमेट&#160;रेज़िलिएंस&#160;के&#160;लीड,&#160;चंद्रकांत&#160;प्रधान&#160;ने&#160;कहा,&#160;“इस&#160;कार्यक्रम&#160;को&#160;जो&#160;बात&#160;असाधारण&#160;बनाती&#160;है,&#160;वह&#160;है&#160;इसमें&#160;पैदा&#160;हुई&#160;सामुदायिक&#160;स्वामित्व&#160;की&#160;गहरी&#160;भावना&#160;है।&#160;जो&#160;किसान&#160;कभी&#160;पराली&#160;जलाने&#160;के&#160;अलावा&#160;कोई&#160;और&#160;विकल्प&#160;नहीं&#160;देखते&#160;थे,&#160;अब&#160;वे&#160;&#8216;इन-सीटू&#8217; (खेत&#160;में&#160;ही)&#160;प्रबंधन&#160;के&#160;पैरोकार&#160;बन&#160;गए&#160;हैं&#160;और&#160;अपने&#160;पड़ोसियों&#160;को&#160;भी&#160;इसके&#160;लिए&#160;सक्रिय&#160;रूप&#160;से&#160;प्रोत्साहित&#160;करते&#160;हैं।&#160;लुधियाना,&#160;संगरूर&#160;और&#160;फतेहाबाद&#160;के&#160;गाँवों&#160;में,&#160;बड़ी&#160;संख्या&#160;में&#160;किसानों&#160;ने&#160;वर्षों&#160;से&#160;चली&#160;आ&#160;रही&#160;धान&#160;की&#160;पराली&#160;को&#160;खुले&#160;खेत&#160;में&#160;जलाने&#160;की&#160;प्रथा&#160;को&#160;छोड़कर,&#160;महज़&#160;दो&#160;से&#160;तीन&#160;साल&#160;के&#160;भीतर&#160;ही&#160;&#8216;ज़ीरो&#160;बर्निंग&#8217; (पराली&#160;न&#160;जलाने)&#160;आंदोलन&#160;के&#160;अग्रदूत&#160;के&#160;रूप&#160;में&#160;अपनी&#160;पहचान&#160;बनाई&#160;है।&#160;यह&#160;इस&#160;बात&#160;का&#160;प्रमाण&#160;है&#160;कि&#160;जब&#160;समुदायों&#160;को&#160;सशक्त&#160;बनाया&#160;जाता&#160;है,&#160;उन्हें&#160;शिक्षित&#160;किया&#160;जाता&#160;है&#160;और&#160;बदलाव&#160;की&#160;अगुवाई&#160;करने&#160;के&#160;लिए&#160;उन&#160;पर&#160;भरोसा&#160;किया&#160;जाता&#160;है,&#160;तो&#160;क्या&#160;कुछ&#160;संभव&#160;हो&#160;सकता&#160;है।” &#160; &#160; &#160;इस&#160;कार्यक्रम&#160;का&#160;मानवीय&#160;पहलू&#160;इसकी&#160;व्यापक&#160;पहुँच&#160;को&#160;दर्शाता&#160;है।&#160;लुधियाना&#160;के&#160;चीमा&#160;गाँव&#160;के&#160;गुरमीत&#160;सिंह&#160;ने&#160;2023&#160;में&#160;अपने&#160;पूरे&#160;खेत&#160;में&#160;सीआरएम&#160;(फसल&#160;अवशेष&#160;प्रबंधन)&#160;पद्धतियों&#160;को&#160;अपनाया&#160;और&#160;तब&#160;से&#160;उन्होंने&#160;प्रति&#160;एकड़&#160;फसल&#160;अवशेष&#160;प्रबंधन&#160;की&#160;अपनी&#160;लागत&#160;को&#160;आधा&#160;कर&#160;दिया&#160;है।&#160;फतेहाबाद&#160;के&#160;लांबा&#160;गाँव&#160;के&#160;एक&#160;छोटे&#160;ज़मीन&#160;मालिक&#160;परमजीत&#160;सिंह&#160;ने&#160;पाया&#160;कि&#160;सहकारी&#160;समिति&#160;के&#160;स्वामित्व&#160;वाले&#160;&#8216;सुपर&#160;सीडर&#8217;&#160;तक&#160;पहुँच&#160;होने&#160;से&#160;उन्हें&#160;महँगी&#160;निजी&#160;मशीनों&#160;को&#160;किराए&#160;पर&#160;लेने&#160;के&#160;वित्तीय&#160;दबाव&#160;से&#160;मुक्ति&#160;मिल&#160;गई।&#160;इससे,&#160;सीमित&#160;संसाधनों&#160;वाले&#160;परिवारों&#160;के&#160;लिए&#160;भी&#160;टिकाऊ&#160;खेती&#160;करना&#160;संभव&#160;हो&#160;गया&#160;है। &#160; &#160; &#160;जैसे-जैसे&#160;यह&#160;कार्यक्रम&#160;2026–27&#160;तक&#160;जारी&#160;रहेगा,&#160;एचडीएफसी&#160;बैंक&#160;परिवर्तन&#160;और&#160;सीआईआई&#160;फाउंडेशन&#160;नए&#160;गाँवों&#160;में&#160;इन&#160;पद्धतियों&#160;को&#160;और&#160;अधिक&#160;गहराई&#160;से&#160;अपनाने, &#8216;एक्स-सीटू&#8217; (खेत&#160;के&#160;बाहर)&#160;पराली&#160;प्रबंधन&#160;के&#160;बुनियादी&#160;ढाँचे&#160;का&#160;विस्तार&#160;करने&#160;और&#160;पूरे&#160;क्षेत्र&#160;में&#160;दीर्घकालिक&#160;कृषि&#160;लचीलापन&#160;विकसित&#160;करने&#160;के&#160;लिए&#160;प्रतिबद्ध&#160;हैं।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://divyaindianews.com/News_id/42564">एचडीएफसी बैंक का &#8216;परिवर्तन&#8217; कार्यक्रम पूरे उत्तर भारत में 3.26 लाख एकड़ से ज़्यादा खेत को पराली जलाने से बचाने में बना मददगार</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://divyaindianews.com">Divya India News</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211;&nbsp;&nbsp;</strong><strong>पंजाब</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>और</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>हरियाणा</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>के</strong><strong>&nbsp;380&nbsp;</strong><strong>गांवों</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>के</strong><strong>&nbsp;86,000&nbsp;</strong><strong>किसान</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>इस</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>पहल</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>में</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>हुए</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>शामिल</strong><strong></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुंबई,4 जून,2026:</strong>  विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, एचडीएफसी बैंक ने अपने  सीएसआर कार्यक्रम &#8216;परिवर्तन&#8217; के ज़रिए, सीआईआई  फाउंडेशन के साथ मिलकर, अपनी &#8216;फसल अवशेष प्रबंधन&#8217; (सीआरएम) पहल में एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की। 2025 के सीज़न में, पंजाब और हरियाणा के कुल 3,78,425 एकड़ खेतों में से 88 फ़ीसदी खेतों को पराली जलाने से बचाया गया। पंजाब के लुधियाना और संगरूर ज़िलों, और हरियाणा के फतेहाबाद ज़िले के 380 से ज़्यादा गांवों के 86,000 किसानों तक पहुँचने वाला यह कार्यक्रम, उत्तर भारत में खेती से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए निजी क्षेत्र की एक व्यापक और असरदार कोशिश है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;धान&nbsp;की&nbsp;कटाई&nbsp;के&nbsp;बाद&nbsp;पराली&nbsp;जलाना,&nbsp;उस&nbsp;गंभीर&nbsp;वायु&nbsp;प्रदूषण&nbsp;के&nbsp;मुख्य&nbsp;कारणों&nbsp;में&nbsp;से&nbsp;एक&nbsp;है&nbsp;जो&nbsp;हर&nbsp;सर्दियों&nbsp;में&nbsp;पूरे&nbsp;उत्तर&nbsp;भारत&nbsp;को&nbsp;अपनी&nbsp;चपेट&nbsp;में&nbsp;ले&nbsp;लेता&nbsp;है।&nbsp;इससे&nbsp;आम&nbsp;जनजीवन&nbsp;अस्त-व्यस्त&nbsp;हो&nbsp;जाता&nbsp;है&nbsp;और&nbsp;दिल&nbsp;व&nbsp;फेफड़ों&nbsp;की&nbsp;पुरानी&nbsp;बीमारियाँ&nbsp;और&nbsp;भी&nbsp;बढ़&nbsp;जाती&nbsp;हैं।&nbsp;लगभग&nbsp;1/3&nbsp;एकड़&nbsp;खेत&nbsp;में&nbsp;पैदा&nbsp;होने&nbsp;वाली&nbsp;एक&nbsp;टन&nbsp;धान&nbsp;की&nbsp;पराली&nbsp;को&nbsp;जलाने&nbsp;से&nbsp;वातावरण&nbsp;में&nbsp;तीन&nbsp;किलोग्राम&nbsp;&#8216;पार्टिकुलेट&nbsp;मैटर&#8217; (बारीक&nbsp;कण)&nbsp;घुल&nbsp;जाते&nbsp;हैं,&nbsp;साथ&nbsp;ही&nbsp;ज़मीन&nbsp;से&nbsp;ज़रूरी&nbsp;पोषक&nbsp;तत्व&nbsp;भी&nbsp;खत्म&nbsp;हो&nbsp;जाते&nbsp;हैं।&nbsp;2025&nbsp;में&nbsp;पंजाब&nbsp;और&nbsp;हरियाणा&nbsp;में&nbsp;पराली&nbsp;जलाने&nbsp;की&nbsp;घटनाओं&nbsp;में&nbsp;53&nbsp;फीसदी&nbsp;की&nbsp;कमी&nbsp;आने&nbsp;के&nbsp;बावजूद,&nbsp;छोटे&nbsp;और&nbsp;सीमांत&nbsp;किसानों&nbsp;को&nbsp;आज&nbsp;भी&nbsp;मशीनें&nbsp;हासिल&nbsp;करने&nbsp;और&nbsp;दो&nbsp;फसलों&nbsp;के&nbsp;बीच&nbsp;के&nbsp;कम&nbsp;समय&nbsp;में&nbsp;फसल&nbsp;के&nbsp;अवशेषों&nbsp;का&nbsp;प्रबंधन&nbsp;करने&nbsp;में&nbsp;कई&nbsp;मुश्किलों&nbsp;का&nbsp;सामना&nbsp;करना&nbsp;पड़&nbsp;रहा&nbsp;है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;अक्टूबर&nbsp;2023&nbsp;में&nbsp;लुधियाना&nbsp;में&nbsp;शुरू&nbsp;हुआ&nbsp;और&nbsp;2024&nbsp;में&nbsp;संगरूर&nbsp;और&nbsp;फतेहाबाद&nbsp;तक&nbsp;फैला,&nbsp;यह&nbsp;तीन&nbsp;साल&nbsp;का&nbsp;कार्यक्रम&nbsp;सीआईआई&nbsp;फाउंडेशन&nbsp;द्वारा&nbsp;380&nbsp;गांवों&nbsp;में&nbsp;लागू&nbsp;किया&nbsp;जा&nbsp;रहा&nbsp;है।&nbsp;अब&nbsp;तक, 8&nbsp;गांवों&nbsp;ने&nbsp;पराली&nbsp;जलाने&nbsp;की&nbsp;प्रथा&nbsp;को&nbsp;पूरी&nbsp;तरह&nbsp;से&nbsp;खत्म&nbsp;कर&nbsp;दिया&nbsp;है,&nbsp;और&nbsp;174&nbsp;गांवों&nbsp;ने&nbsp;90&nbsp;फीसदी&nbsp;से&nbsp;अधिक&nbsp;&#8216;बिना&nbsp;जलाए&#8217; (&nbsp;नॉन&nbsp;बर्निंग)&nbsp;नियमों&nbsp;का&nbsp;पालन&nbsp;किया&nbsp;है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp; &nbsp; &nbsp;</strong><strong>एचडीएफसी</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>बैंक</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>की</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>सीएसआर</strong><strong>&nbsp;&nbsp;</strong><strong>प्रमुख</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>नुसरत</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>पठान</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>ने</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>इस</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>उपलब्धि</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>के</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>बारे</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>में</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>बात</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>करते</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>हुए</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>कहा</strong><strong>,</strong>&nbsp;“पराली&nbsp;जलाना&nbsp;सिर्फ़&nbsp;एक&nbsp;कृषि&nbsp;आदत&nbsp;नहीं&nbsp;है,&nbsp;यह&nbsp;एक&nbsp;व्यवस्थागत&nbsp;चुनौती&nbsp;है&nbsp;जिसकी&nbsp;जड़ें&nbsp;अर्थव्यवस्था,&nbsp;पहुंच&nbsp;और&nbsp;जागरूकता&nbsp;में&nbsp;हैं।&nbsp;एचडीएफसी&nbsp;बैंक&nbsp;परिवर्तन&nbsp;की&nbsp;सीआईइई&nbsp;फाउंडेशन&nbsp;के&nbsp;साथ&nbsp;साझेदारी&nbsp;ने&nbsp;इन&nbsp;तीनों&nbsp;पहलुओं&nbsp;को&nbsp;एक&nbsp;साथ&nbsp;संबोधित&nbsp;किया&nbsp;है।&nbsp;सहकारी&nbsp;टूल&nbsp;बैंकों&nbsp;के&nbsp;माध्यम&nbsp;से&nbsp;किसानों&nbsp;तक&nbsp;मशीनरी&nbsp;की&nbsp;पहुंच&nbsp;बनाकर,&nbsp;लगातार&nbsp;सामुदायिक&nbsp;जुड़ाव&nbsp;के&nbsp;ज़रिए&nbsp;व्यवहार&nbsp;में&nbsp;बदलाव&nbsp;लाकर,&nbsp;और&nbsp;बायोगैस&nbsp;व&nbsp;कम्पोस्टिंग&nbsp;जैसे&nbsp;&#8216;एक्स-सीटू&#8217; (खेत&nbsp;के&nbsp;बाहर)&nbsp;समाधान&nbsp;पेश&nbsp;करके,&nbsp;हमने&nbsp;एक&nbsp;ऐसा&nbsp;मॉडल&nbsp;तैयार&nbsp;किया&nbsp;है&nbsp;जो&nbsp;किसानों&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;वास्तविक&nbsp;बचत&nbsp;के&nbsp;साथ-साथ&nbsp;पर्यावरणीय&nbsp;परिणाम&nbsp;भी&nbsp;देता&nbsp;है।&nbsp;विश्व&nbsp;पर्यावरण&nbsp;दिवस&nbsp;के&nbsp;अवसर&nbsp;पर,&nbsp;हम&nbsp;इस&nbsp;प्रभाव&nbsp;को&nbsp;और&nbsp;आगे&nbsp;बढ़ाने&nbsp;की&nbsp;अपनी&nbsp;प्रतिबद्धता&nbsp;को&nbsp;दोहराते&nbsp;हैं।”</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;इस&nbsp;कार्यक्रम&nbsp;की&nbsp;सफलता&nbsp;का&nbsp;आधार&nbsp;&#8216;सामुदायिक&nbsp;टूल&nbsp;बैंक&#8217;&nbsp;का&nbsp;दृष्टिकोण&nbsp; 450&nbsp;से&nbsp;अधिक&nbsp;कृषि&nbsp;मशीनें&nbsp;है&nbsp;जिनमें&nbsp;खरीदी&nbsp;गईं&nbsp;बेलर,&nbsp;सुपर&nbsp;सीडर,&nbsp;स्मार्ट&nbsp;सीडर&nbsp;और&nbsp;मित्र&nbsp;सीडर&nbsp;शामिल&nbsp;हैं&nbsp;&nbsp;और&nbsp;140&nbsp;से&nbsp;अधिक&nbsp;किसान&nbsp;सहकारी&nbsp;समितियों&nbsp;तथा&nbsp;किसान&nbsp;उत्पादक&nbsp;संगठनों&nbsp;(एफपीओज़)&nbsp;को&nbsp;दान&nbsp;की&nbsp;गईं,&nbsp;जिससे&nbsp;ये&nbsp;मशीनें&nbsp;किसानों&nbsp;को&nbsp;किफायती&nbsp;किराए&nbsp;पर&nbsp;उपलब्ध&nbsp;हो&nbsp;सकीं।&nbsp;पराली&nbsp;जलाने&nbsp;के&nbsp;सबसे&nbsp;ज़्यादा&nbsp;समय&nbsp;के&nbsp;दौरान,&nbsp;छोटे&nbsp;और&nbsp;सीमांत&nbsp;किसानों&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;किराए&nbsp;पर&nbsp;800&nbsp;ट्रैक्टर&nbsp;उपलब्ध&nbsp;कराए&nbsp;गए।&nbsp;मशीनरी&nbsp;के&nbsp;उपयोग&nbsp;से&nbsp;&#8216;इन-सीटू&#8217; (खेत&nbsp;में&nbsp;ही)&nbsp;अवशेष&nbsp;प्रबंधन,&nbsp;मल्चिंग&nbsp;और&nbsp;धान&nbsp;की&nbsp;पराली&nbsp;को&nbsp;मिट्टी&nbsp;में&nbsp;मिलाने&nbsp;का&nbsp;काम&nbsp;संभव&nbsp;हो&nbsp;पाता&nbsp;है;&nbsp;साथ&nbsp;ही,&nbsp;मिट्टी&nbsp;तैयार&nbsp;करने,&nbsp;गेहूं&nbsp;के&nbsp;बीज&nbsp;बोने&nbsp;और&nbsp;खाद&nbsp;डालने&nbsp;का&nbsp;काम&nbsp;भी&nbsp;एक&nbsp;ही&nbsp;बार&nbsp;में&nbsp;पूरा&nbsp;हो&nbsp;जाता&nbsp;है।&nbsp;इससे&nbsp;पराली&nbsp;प्रबंधन&nbsp;और&nbsp;बुवाई&nbsp;की&nbsp;लागत&nbsp;2,000–2,500&nbsp;रुपए&nbsp;प्रति&nbsp;एकड़&nbsp;से&nbsp;घटकर&nbsp;लगभग&nbsp;800–1,200&nbsp;रुपए&nbsp;प्रति&nbsp;एकड़&nbsp;रह&nbsp;जाती&nbsp;है,&nbsp;और&nbsp;साथ&nbsp;ही&nbsp;लंबे&nbsp;समय&nbsp;में&nbsp;मिट्टी&nbsp;की&nbsp;उर्वरता&nbsp;में&nbsp;सुधार&nbsp;होता&nbsp;है&nbsp;और&nbsp;रासायनिक&nbsp;खादों&nbsp;पर&nbsp;निर्भरता&nbsp;कम&nbsp;होती&nbsp;है।&nbsp;जो&nbsp;किसान&nbsp;&#8216;इन-सीटू&#8217; (खेत&nbsp;में&nbsp;ही)&nbsp;पराली&nbsp;प्रबंधन&nbsp;के&nbsp;तरीके&nbsp;नहीं&nbsp;अपना&nbsp;पाते,&nbsp;वे&nbsp;बेलर&nbsp;मशीनों&nbsp;का&nbsp;उपयोग&nbsp;करके&nbsp;पराली&nbsp;को&nbsp;मशीनी&nbsp;तरीके&nbsp;से&nbsp;जल्दी&nbsp;से&nbsp;इकट्ठा&nbsp;कर&nbsp;सकते&nbsp;हैं,&nbsp;उसकी&nbsp;गठरियां&nbsp;बना&nbsp;सकते&nbsp;हैं&nbsp;और&nbsp;उसका&nbsp;निपटान&nbsp;कर&nbsp;सकते&nbsp;हैं।&nbsp;30&nbsp;से&nbsp;अधिक&nbsp;ग्रामीण&nbsp;युवाओं&nbsp;को&nbsp;मार्गदर्शन&nbsp;दिया&nbsp;गया&nbsp;और&nbsp;बेलर&nbsp;मशीनें&nbsp;उपलब्ध&nbsp;कराकर&nbsp;उनका&nbsp;सहयोग&nbsp;किया&nbsp;गया,&nbsp;ताकि&nbsp;वे&nbsp;धान&nbsp;की&nbsp;पराली&nbsp;इकट्ठा&nbsp;करने,&nbsp;आपूर्ति&nbsp;श्रृंखला&nbsp;प्रबंधन&nbsp;और&nbsp;&#8216;मूल्य&nbsp;संवर्धन&#8217; (वैल्यू&nbsp;एडिशन)&nbsp;के&nbsp;क्षेत्र&nbsp;में&nbsp;अपने&nbsp;छोटे&nbsp;व्यवसाय&nbsp;शुरू&nbsp;कर&nbsp;सकें।&nbsp;इस&nbsp;कार्यक्रम&nbsp;के&nbsp;तहत,&nbsp;खेत&nbsp;के&nbsp;बाहर&nbsp;(एक्स-&nbsp;सीटू)&nbsp;पराली&nbsp;प्रबंधन&nbsp;को&nbsp;बेहतर&nbsp;बनाने&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;धान&nbsp;की&nbsp;पराली&nbsp;पर&nbsp;आधारित&nbsp;18&nbsp;छोटे&nbsp;बायोगैस&nbsp;संयंत्र&nbsp;स्थापित&nbsp;किए&nbsp;गए&nbsp;हैं&nbsp;और&nbsp;दो&nbsp;बायो-पेलेटाइजेशन&nbsp;संयंत्र&nbsp;तथा&nbsp;एक&nbsp;जैव-उर्वरक&nbsp;संयंत्र&nbsp;स्थापित&nbsp;किए&nbsp;जा&nbsp;रहे&nbsp;हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;हज़ारों&nbsp;गाँव-स्तर&nbsp;की&nbsp;बैठकों,&nbsp;किसानों&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;जागरूकता&nbsp;सत्रों&nbsp;और&nbsp;कृषि&nbsp;विभाग&nbsp;के&nbsp;साथ&nbsp;साझेदारी&nbsp;में&nbsp;आयोजित&nbsp;प्रशिक्षण&nbsp;कार्यक्रमों&nbsp;के&nbsp;ज़रिए&nbsp;किसानों&nbsp;की&nbsp;भागीदारी&nbsp;और&nbsp;उनके&nbsp;व्यवहार&nbsp;में&nbsp;स्थायी&nbsp;बदलाव&nbsp;लाया&nbsp;गया&nbsp;है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp; &nbsp; &nbsp;</strong><strong>सीआईआई</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>फाउंडेशन</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>में</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>क्लाइमेट</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>रेज़िलिएंस</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>के</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>लीड</strong><strong>,&nbsp;</strong><strong>चंद्रकांत</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>प्रधान</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>ने</strong><strong>&nbsp;</strong><strong>कहा</strong><strong>,</strong>&nbsp;“इस&nbsp;कार्यक्रम&nbsp;को&nbsp;जो&nbsp;बात&nbsp;असाधारण&nbsp;बनाती&nbsp;है,&nbsp;वह&nbsp;है&nbsp;इसमें&nbsp;पैदा&nbsp;हुई&nbsp;सामुदायिक&nbsp;स्वामित्व&nbsp;की&nbsp;गहरी&nbsp;भावना&nbsp;है।&nbsp;जो&nbsp;किसान&nbsp;कभी&nbsp;पराली&nbsp;जलाने&nbsp;के&nbsp;अलावा&nbsp;कोई&nbsp;और&nbsp;विकल्प&nbsp;नहीं&nbsp;देखते&nbsp;थे,&nbsp;अब&nbsp;वे&nbsp;&#8216;इन-सीटू&#8217; (खेत&nbsp;में&nbsp;ही)&nbsp;प्रबंधन&nbsp;के&nbsp;पैरोकार&nbsp;बन&nbsp;गए&nbsp;हैं&nbsp;और&nbsp;अपने&nbsp;पड़ोसियों&nbsp;को&nbsp;भी&nbsp;इसके&nbsp;लिए&nbsp;सक्रिय&nbsp;रूप&nbsp;से&nbsp;प्रोत्साहित&nbsp;करते&nbsp;हैं।&nbsp;लुधियाना,&nbsp;संगरूर&nbsp;और&nbsp;फतेहाबाद&nbsp;के&nbsp;गाँवों&nbsp;में,&nbsp;बड़ी&nbsp;संख्या&nbsp;में&nbsp;किसानों&nbsp;ने&nbsp;वर्षों&nbsp;से&nbsp;चली&nbsp;आ&nbsp;रही&nbsp;धान&nbsp;की&nbsp;पराली&nbsp;को&nbsp;खुले&nbsp;खेत&nbsp;में&nbsp;जलाने&nbsp;की&nbsp;प्रथा&nbsp;को&nbsp;छोड़कर,&nbsp;महज़&nbsp;दो&nbsp;से&nbsp;तीन&nbsp;साल&nbsp;के&nbsp;भीतर&nbsp;ही&nbsp;&#8216;ज़ीरो&nbsp;बर्निंग&#8217; (पराली&nbsp;न&nbsp;जलाने)&nbsp;आंदोलन&nbsp;के&nbsp;अग्रदूत&nbsp;के&nbsp;रूप&nbsp;में&nbsp;अपनी&nbsp;पहचान&nbsp;बनाई&nbsp;है।&nbsp;यह&nbsp;इस&nbsp;बात&nbsp;का&nbsp;प्रमाण&nbsp;है&nbsp;कि&nbsp;जब&nbsp;समुदायों&nbsp;को&nbsp;सशक्त&nbsp;बनाया&nbsp;जाता&nbsp;है,&nbsp;उन्हें&nbsp;शिक्षित&nbsp;किया&nbsp;जाता&nbsp;है&nbsp;और&nbsp;बदलाव&nbsp;की&nbsp;अगुवाई&nbsp;करने&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;उन&nbsp;पर&nbsp;भरोसा&nbsp;किया&nbsp;जाता&nbsp;है,&nbsp;तो&nbsp;क्या&nbsp;कुछ&nbsp;संभव&nbsp;हो&nbsp;सकता&nbsp;है।”</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;इस&nbsp;कार्यक्रम&nbsp;का&nbsp;मानवीय&nbsp;पहलू&nbsp;इसकी&nbsp;व्यापक&nbsp;पहुँच&nbsp;को&nbsp;दर्शाता&nbsp;है।&nbsp;लुधियाना&nbsp;के&nbsp;चीमा&nbsp;गाँव&nbsp;के&nbsp;गुरमीत&nbsp;सिंह&nbsp;ने&nbsp;2023&nbsp;में&nbsp;अपने&nbsp;पूरे&nbsp;खेत&nbsp;में&nbsp;सीआरएम&nbsp;(फसल&nbsp;अवशेष&nbsp;प्रबंधन)&nbsp;पद्धतियों&nbsp;को&nbsp;अपनाया&nbsp;और&nbsp;तब&nbsp;से&nbsp;उन्होंने&nbsp;प्रति&nbsp;एकड़&nbsp;फसल&nbsp;अवशेष&nbsp;प्रबंधन&nbsp;की&nbsp;अपनी&nbsp;लागत&nbsp;को&nbsp;आधा&nbsp;कर&nbsp;दिया&nbsp;है।&nbsp;फतेहाबाद&nbsp;के&nbsp;लांबा&nbsp;गाँव&nbsp;के&nbsp;एक&nbsp;छोटे&nbsp;ज़मीन&nbsp;मालिक&nbsp;परमजीत&nbsp;सिंह&nbsp;ने&nbsp;पाया&nbsp;कि&nbsp;सहकारी&nbsp;समिति&nbsp;के&nbsp;स्वामित्व&nbsp;वाले&nbsp;&#8216;सुपर&nbsp;सीडर&#8217;&nbsp;तक&nbsp;पहुँच&nbsp;होने&nbsp;से&nbsp;उन्हें&nbsp;महँगी&nbsp;निजी&nbsp;मशीनों&nbsp;को&nbsp;किराए&nbsp;पर&nbsp;लेने&nbsp;के&nbsp;वित्तीय&nbsp;दबाव&nbsp;से&nbsp;मुक्ति&nbsp;मिल&nbsp;गई।&nbsp;इससे,&nbsp;सीमित&nbsp;संसाधनों&nbsp;वाले&nbsp;परिवारों&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;भी&nbsp;टिकाऊ&nbsp;खेती&nbsp;करना&nbsp;संभव&nbsp;हो&nbsp;गया&nbsp;है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;जैसे-जैसे&nbsp;यह&nbsp;कार्यक्रम&nbsp;2026–27&nbsp;तक&nbsp;जारी&nbsp;रहेगा,&nbsp;एचडीएफसी&nbsp;बैंक&nbsp;परिवर्तन&nbsp;और&nbsp;सीआईआई&nbsp;फाउंडेशन&nbsp;नए&nbsp;गाँवों&nbsp;में&nbsp;इन&nbsp;पद्धतियों&nbsp;को&nbsp;और&nbsp;अधिक&nbsp;गहराई&nbsp;से&nbsp;अपनाने, &#8216;एक्स-सीटू&#8217; (खेत&nbsp;के&nbsp;बाहर)&nbsp;पराली&nbsp;प्रबंधन&nbsp;के&nbsp;बुनियादी&nbsp;ढाँचे&nbsp;का&nbsp;विस्तार&nbsp;करने&nbsp;और&nbsp;पूरे&nbsp;क्षेत्र&nbsp;में&nbsp;दीर्घकालिक&nbsp;कृषि&nbsp;लचीलापन&nbsp;विकसित&nbsp;करने&nbsp;के&nbsp;लिए&nbsp;प्रतिबद्ध&nbsp;हैं।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://divyaindianews.com/News_id/42564">एचडीएफसी बैंक का &#8216;परिवर्तन&#8217; कार्यक्रम पूरे उत्तर भारत में 3.26 लाख एकड़ से ज़्यादा खेत को पराली जलाने से बचाने में बना मददगार</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://divyaindianews.com">Divya India News</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>एचडीएफसी बैंक  व्हाट्सएप चैट बैंकिंग ने 1 करोड़ यूनिक मंथली एक्टिव यूज़र्स का मील का पत्थर पार किया</title>
		<link>https://divyaindianews.com/News_id/42560</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 14:35:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुंबई, 12 मई, 2026:&#160;एचडीएफसी बैंक के व्हाट्सएप चैट बैंकिंग प्लेटफ़ॉर्म ने इस्तेमाल के मामले में कई अहम मील के पत्थर पार कर लिए हैं।&#160; इस प्लेटफ़ॉर्म पर 31 मार्च, 2026 तक 1 करोड़ से ज़्यादा 30-दिन के एक्टिव यूज़र्स और 2 करोड़ से ज़्यादा 90-दिन के एक्टिव यूज़र्स थे। यह प्लेटफ़ॉर्म अब 4 करोड़ से &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुंबई, 12 मई, 2026:</strong>&nbsp;एचडीएफसी बैंक के व्हाट्सएप चैट बैंकिंग प्लेटफ़ॉर्म ने इस्तेमाल के मामले में कई अहम मील के पत्थर पार कर लिए हैं।&nbsp; इस प्लेटफ़ॉर्म पर 31 मार्च, 2026 तक 1 करोड़ से ज़्यादा 30-दिन के एक्टिव यूज़र्स और 2 करोड़ से ज़्यादा 90-दिन के एक्टिव यूज़र्स थे। यह प्लेटफ़ॉर्म अब 4 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड ग्राहकों को सेवाएँ दे रहा है, जो बैंक के कुल ग्राहक आधार का लगभग 40 प्रतिशत है। यूज़र्स की संख्या में बढ़ोतरी के साथ-साथ, लेन-देन में भी 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो ग्राहकों की गहरी भागीदारी को दिखाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज, एचडीएफसी बैंक व्हाट्सएप पर सेवाओं का सबसे व्यापक सेट पेश करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म 19 प्रोडक्ट लाइनों में 225 से ज़्यादा सेवाओं के साथ रोज़मर्रा की बैंकिंग ज़रूरतों, लेन-देन से जुड़ी प्रक्रियाओं और पहले से मिलने वाले सर्विस अलर्ट को कवर करता है। यह तेज़ी से इस इंडस्ट्री के सबसे आधुनिक बातचीत-आधारित बैंकिंग इकोसिस्टम में से एक बन गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एचडीएफसी बैंक ने शुरू में ही पहचान लिया था कि बातचीत-आधारित इंटरफ़ेस सिर्फ़ आम बातचीत से आगे बढ़कर, कॉमर्स के लिए शक्तिशाली प्लेटफ़ॉर्म बन रहे हैं जिनमें शॉपिंग, खाना ऑर्डर करना और रोज़मर्रा की बातचीत शामिल है। इस बदलाव को पहचानते हुए, बैंक ने 2022 में चैट बैंकिंग शुरू की। इसे बैंकिंग की बुनियादी ज़रूरतों के लिए एक सुविधाजनक सर्विस चैनल के तौर पर पेश किया गया और इस तरह बैंकिंग को सीधे ग्राहकों की रोज़मर्रा की डिजिटल आदतों का हिस्सा बना दिया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए बैंक ने लगातार नए-नए प्रोडक्ट डिज़ाइन पर ध्यान दिया है। इसने इंडस्ट्री में पहली बार कई ऐसी सुविधाएँ पेश की हैं, जिनमें वॉइस नोट-आधारित इनपुट शामिल हैं। इनकी मदद से ग्राहक हिंदी, अंग्रेज़ी या हिंग्लिश में आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह दुनिया के उन पहले बैंकों में से एक है जिसने कोर बैंकिंग सिस्टम से मिलने वाले सर्विस अलर्ट को एक साथ दिखाने की सुविधा दी है। साथ ही, ज़्यादा मुश्किल सवालों के जवाब देने के लिए एआई-पावर्ड बॉट और ह्यूमन एजेंट, दोनों की मदद लेने की सुविधा भी दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए, बैंक ने &#8216; कनेक्ट टू आरएम&#8217; फ़ीचर की शुरुआत की। इसकी मदद से यूज़र्स अपने रिलेशनशिप मैनेजर की जानकारी देख सकते हैं और तुरंत उन्हें वापस कॉल करने का अनुरोध कर सकते हैं। हाल ही में, इसने क्विक एफडी बुकिंग और कन्वर्ट टू ईएमआई जैसी पूरी तरह से इंटीग्रेटेड सुविधाएँ शुरू की हैं। इन्हें सिर्फ़ तीन आसान स्टेप्स में पूरा किया जा सकता है, जिससे बीच में ही प्रक्रिया छोड़ने वाले ग्राहकों की संख्या में काफ़ी कमी आई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एचडीएफसी बैंक के पेमेंट्स और डिजिटल बैंकिंग चैनल्स के हेड, रजनीश परमानंद प्रभु&nbsp;</strong>ने इस मील के पत्थर के बारे में बात करते हुए कहा: “1 करोड़ यूनिक मंथली एक्टिव यूज़र्स का मील का पत्थर पार करना हमारी डिजिटल यात्रा में एक अहम पल है। जो एक साधारण सर्विस इंटरफ़ेस के तौर पर शुरू हुआ था, वह अब एक पूरे पैमाने वाले कन्वर्सेशनल बैंकिंग इकोसिस्टम में बदल गया है। ग्राहक अब आम सेवाओं और ज़्यादा कीमत वाले लेन-देन, दोनों के लिए चैट को ज़्यादा चुन रहे हैं। हमारा ध्यान बैंकिंग को और ज़्यादा ग्राहक-केंद्रित, आसान और उन प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध बनाने पर है जिनका इस्तेमाल ग्राहक हर दिन करते हैं।”</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह पैमाना एक केंद्रित 360-डिग्री रणनीति की वजह से मुमकिन हो पाया है। इस रणनीति में ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल करके उन्हें खास सर्विस सुझाव देना, मोबाइल बैंकिंग और &#8216;पे-जै़प&#8217; जैसे डिजिटल टचपॉइंट्स पर अलग-अलग चैनलों के ज़रिए चैट बैंकिंग को बढ़ावा देना, बातचीत की फ़्रीक्वेंसी और आकर्षक क्रिएटिव्स को बेहतर बनाकर संचार को ऑप्टिमाइज़ करना, और रियल-टाइम एनपीएस ट्रैकिंग और ग्राहक के फ़ीडबैक के आधार पर लगातार सुधार करना शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मेटा इंडिया में बिज़नेस मैसेजिंग के डायरेक्टर, रवि गर्ग ने कहा</strong>: “व्हाट्सएप इस बात को बदल रहा है कि बिज़नेस और ग्राहक एक-दूसरे से कैसे बातचीत करते हैं और अपने काम कैसे पूरे करते हैं। इस तरह के मील के पत्थर दिखाते हैं कि मैसेजिंग सचमुच कैसे सार्थक मूल्य दे सकती है और बेहतर अनुभव बना सकती है। हमें यह देखकर खुशी हो रही है कि एचडीएफसी बैंक बड़े पैमाने पर सुविधाजनक और सुरक्षित बैंकिंग अनुभव देने के लिए व्हाट्सएप की ताकत का सचमुच इस्तेमाल कर रहा है।”</p>



<p class="wp-block-paragraph">एचडीएफसी बैंक नई प्रोडक्ट लाइन्स के साथ अपनी चैट बैंकिंग क्षमताओं को और बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसका मकसद चैट बैंकिंग को ग्राहकों के लिए पसंदीदा सेल्फ़-सर्विस चैनलों में से एक बनाना है।</p>
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		<title>एचडीएफसी बैंक परिवर्तन ने 15,200 से ज़्यादा जल निकायें बनाए, ग्रामीण भारत के 15 लाख परिवारों को जल सुरक्षा मिली</title>
		<link>https://divyaindianews.com/News_id/42554</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divya India News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 16:10:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[टॉप न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[बिजनेस]]></category>
		<category><![CDATA[HDFC BANK]]></category>
		<category><![CDATA[hdfc bank news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyaindianews.com/?p=42554</guid>

					<description><![CDATA[<p>&#8211; बैंक ने 28 राज्यों में जल संरक्षण के प्रयासों का एक दशक पूरा किया, हिमालय में &#8216;आइस स्तूप&#8217; से लेकर सूखा-ग्रस्त ज़िलों में &#8216;चेक डैम&#8217; तक बनाए मुंबई, 16 अप्रैल, 2026:&#160;एचडीएफसी बैंक&#160; के मुख्य कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर)&#160; कार्यक्रम, एचडीएफसी बैंक परिवर्तन ने घोषणा की है कि उसने पूरे भारत में कुल मिलाकर 15,289 &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; बैंक ने 28 राज्यों में जल संरक्षण के प्रयासों का एक दशक पूरा किया, हिमालय में &#8216;आइस स्तूप&#8217; से लेकर सूखा-ग्रस्त ज़िलों में &#8216;चेक डैम&#8217; तक बनाए</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुंबई, 16 अप्रैल, 2026:</strong>&nbsp;एचडीएफसी बैंक&nbsp; के मुख्य कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर)&nbsp; कार्यक्रम, एचडीएफसी बैंक परिवर्तन ने घोषणा की है कि उसने पूरे भारत में कुल मिलाकर 15,289 से ज़्यादा जल निकायें बनाए हैं और&nbsp; उनकी मरम्मत की है। ये निकायें 10,430 से ज़्यादा गाँवों में फैले हैं और इनसे 14.92 लाख परिवारों को मदद मिली है। इसके &#8216;स्वास्थ्य और स्वच्छता&#8217; ( हेल्थ एंड हाइजीन) स्तंभ के तहत, 950 से ज़्यादा गाँवों को सामुदायिक शुद्धिकरण प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;बैंक ने इन सभी क्षेत्रों में जल से जुडे कई तरह के संसाधनों का निर्माण के साथ-साथ उनकी मरम्मत की है। इनमें खेतों में तालाब ( फार्म पोंडस), चेक डैम, पानी के बँटवारे के लिए &#8216;जल मीनार&#8217;, और स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा घरों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियाँ शामिल हैं। मध्य भारत में, &#8216;वाटर&#8217; पहल के माध्यम से &#8216;लिफ्ट सिंचाई&#8217; और &#8216;रीचार्ज कुओं&#8217; ने आदिवासी किसान समुदायों तक पानी की पहुँच बढ़ाई है। पेयजल के लिए, बैंक ने स्थानीय जल स्रोतों के विश्लेषण के आधार पर&nbsp; यूवी, आरओ या कई चरणों वाली शुद्धिकरण (मल्टी स्टेज फिल्ट्रेशन) तकनीक का उपयोग करके छोटे शुद्धिकरण संयंत्र लगाए हैं। इन्हें सामुदायिक जल टैंक, नल के कनेक्शन और पानी की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली प्रणालियों का भी सहयोग मिला है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;केवल जल निकायें बनाने से ही खेती में बदलाव नहीं आता। एचडीएफसी बैंक परिवर्तन हर संरचनात्मक निवेश के साथ कृषि संबंधी सहायता भी देता है। इसमें सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियाँ माइक्रो इरिगेशन सिस्टमस), &#8216;शेड नेट हाउस&#8217;, &#8216;जैव-इनपुट संसाधन केंद्र&#8217; ( बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर्स) और &#8216;बहु-स्तरीय खेती&#8217; (मल्टी लेयर फार्मिंग) के तरीके शामिल हैं। इन सभी के मिले-जुले प्रयासों से सिंचाई के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र बढ़ा है, अनियमित वर्षा पर निर्भरता कम हुई है, और छोटे किसानों की फ़सलों की पैदावार में सुधार हुआ है। जल का उपयोग करने वाले सामुदायिक समूहों को &#8216;जल बजट&#8217; बनाने और पानी का समझदारी से उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी जल संरचना बनने के लंबे समय बाद तक भी उपयोगी बनी रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;इस कार्यक्रम की रूपरेखा में &#8216;सामुदायिक स्वामित्व&#8217; (कम्युनिटी ओनरशिप) को केंद्रीय महत्व दिया गया है। &#8216;महिला स्वयं-सहायता समूहों&#8217; और &#8216;जल उपयोगकर्ता संघों&#8217; के साथ मिलकर तैयार की गई &#8216;सहभागी ग्राम कार्य योजनाएँ&#8217; ( पार्टिसिपेटरी विलेज एक्शन प्लांस ) यह सुनिश्चित करती हैं कि हर निवेश स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हो।&nbsp; जीआईएस -आधारित नियोजन प्लानिंग से किसी भी स्थान का चयन पूरी सटीकता के साथ किया जाता है। &#8216;मनरेगा&#8217; जैसी सरकारी योजनाओं के साथ तालमेल बिठाने से इस कार्यक्रम का प्रभाव और भी गहरा होता है, और काम की पुनरावृत्ति (डुप्लीकेशन) से बचा जा सकता है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp; &nbsp; &nbsp;एचडीएफसी बैंक की सीएसआर हेड, सुश्री नुसरत पठान ने इस मौके पर बोलते हुए कहा,</strong>&nbsp;“एचडीएफसी बैंक परिवर्तन में हमने समुदायों तक पहुँचने और उनकी ज़रूरतों को पूरा करने का काम किया है, चाहे पहाड़ों में &#8216;आइस स्तूप&#8217; बनाना हो या उन गाँवों में पानी शुद्ध करने वाले प्लांट लगाना हो, जहाँ पहले कभी साफ़ नल का पानी नहीं पहुँचा था। ‘परिवर्तन’ के ज़रिए हमारा काम वाटरशेड डेवलपमेंट, बारिश के पानी को जमा करना, जल निकायों का निर्माण और उन्हें फिर से जीवित करना, आखिरी छोर तक सिंचाई का इंफ्रास्ट्रक्चर पहुँचाना और पर्यावरण के अनुकूल खेती के तरीकों को बढ़ावा देना है। 15,000 से ज़्यादा जल संरचनाएँ बनाना और लगभग एक हज़ार गाँवों को सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन हमारी असली सफलता उन खेतों में दिखती है जहाँ अब दूसरी फ़सल भी उगती है और उन बच्चों में जो अब गंदे पानी की वजह से बीमार नहीं पड़ते। हम एक &#8216;जल-सुरक्षित भारत&#8217; बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;एचडीएफसी बैंक परिवर्तन के जल संरक्षण के प्रयास एक दशक से भी ज़्यादा समय से और कई राज्यों में चल रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में, &#8216;प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन&#8217; को औपचारिक रूप से &#8216;परिवर्तन&#8217; के तहत एक खास फोकस क्षेत्र के तौर पर शामिल किया गया। इसके तहत जल संरक्षण, पेड़ लगाना, मिट्टी का स्वास्थ्य और सौर ऊर्जा जैसे विषयों को एक ही कार्यक्रम में एक साथ लाया गया है। इन प्रयासों के ज़रिए, एचडीएफसी बैंक परिवर्तन &#8216;सतत विकास लक्ष्य 6&#8217; (साफ़ पानी और स्वच्छता) और &#8216;एसडीजी 13&#8217; (जलवायु कार्रवाई) की दिशा में काम करता है, और अपने ग्रामीण विकास के एजेंडे में जल सुरक्षा को सबसे ज़्यादा महत्व देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp;&#8216;परिवर्तन&#8217;, जो एचडीएफसी बैंक का मुख्य सीएसआर कार्यक्रम है,&nbsp; मुख्य तौर पर छह क्षेत्रों- ग्रामीण विकास, शिक्षा को बढ़ावा, कौशल विकास और आजीविका में सुधार, स्वास्थ्य सेवा और स्वच्छता, वित्तीय साक्षरता और समावेशन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में विकास को बढ़ावा देता है । &#8216;परिवर्तन&#8217; ने मार्च 2025 तक 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 10.56 करोड़ से ज़्यादा लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।&nbsp; एचडीएफसी बैंक ने &#8216;परिवर्तन&#8217; के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में सीएसआर गतिविधियों पर 1,068.03 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।</p>
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