चुनाव में अत्यधिक खर्च पर रोक लगाने के सुझावों पर विचार करें निर्वाचन आयोग, SC का निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग को चुनाव में होने वाले अत्यधिक खर्च पर अंकुश लगाने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) में सुझावों को शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने जनहित याचिका को एक अभ्यावेदन के रूप में मानने को कहा है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारी की पीठ ने टिप्पणी की कि कोर्ट चुनाव में होने वाले अत्यधिक खर्च पर तीसरे पक्ष की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं कर सकता, क्योंकि क्योंकि चुनाव आयोग ने भी इन रिपोर्टों का खंडन किया है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता प्रभाकर देशपांडे एक आइआइटी स्नातक हैं, उनके द्वारा दिए गए सुझाव विचारणीय हैं।

प्रभाकर देशपांडे ने चुनाव आयोग को दोषी उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई योजना बनाने और लोकतांत्रिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव खर्च पर सीमा की पुन: जांच करने के निर्देश देने की मांग की थी।

हालांकि, चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय सेवाओं से स्वतंत्र व्यय पर्यवेक्षकों की तैनाती सहित अपने मौजूदा निगरानी तंत्रों का बचाव किया, लेकिन पीठ ने कहा कि इन उपायों की प्रभावशीलता के संबंध में याचिकाकर्ता की शिकायतें व्यापक जनहित में दायर की गई हैं।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमें इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि याचिका व्यापक जनहित में दायर की गई है।

याचिका में चुनाव आयोग से अत्यधिक चुनावी खर्च पर अंकुश लगाने के लिए एक विस्तृत नीति बनाने की मांग की गई है। याचिका में ऐसे खर्चों का विवरण देने वाली एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।

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