
नई दिल्ली। मकर संक्रांति और लोहड़ी की खुशियों के बीच मेरे लिए एक और हर्ष का विषय रहा, मेरी दूसरी काव्य पुस्तक (कविताओं का संकलन )जिसका शीर्षक मैंने दिया है “संसार जिसे मैंने चुना ” के लोकार्पण का।
दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में (14.1.2026) आदरणीय जीतेन्द्र श्रीवास्तव जी, श्री अजित कुमार राय जी, श्री महेश दर्पण जी, श्री हीरालाल नागर जी, श्री प्रदीप पंत जी,प्रकाशक श्री जीतेन्द्र पात्रो जी, श्री शुभम जी व अन्य गण मान्य साहित्यकारों के द्वारा प्रलेक प्रकाशन के स्टॉल (P 03) लोकार्पण हुआ।
इस संकलन में में मेरी वह रचनाएँ हैं जो मेरे मन को समाज से, रिश्तों से जुड़ते हुए उनकी अनुगूँज लिए हैं।
कभी- कभी कोई भाव अपने न होते हुए भी स्वयं में अनुभव कर उसे समझने के लिए भी प्रेरित करते हैं। ऐसा कई बार हुआ जब मुझे लगा कि, मैं यदि ऐसा अनुभव करूँ तो कैसा लगेगा।
तो समझ आया कि कई स्थितियाँ बहुत विकट होती हैं, जिसमें व्यक्ति घुटने लगता है। इन सभी स्थितियों से पार जाने का मार्ग भी समाज के हर वर्ग से होकर जाता है।
आवश्यकता है कि हम उस स्थिति को चुने जो हमें हमारे समाज के साथ बेहतर स्थिति में ला सकें। हम जो चुनते हैं वह हमारा छोटा सा संसार हो जाता है जो हमेशा हमारे आस -पास होता है।
इन छोटे- छोटे संसार से होकर जिस अलौकिक संसार की राह निकलती है वो मैंने चुना है…. ” संसार जिसे मैंने चुना ” एक बार हाथ में लेकर इसके शब्दों के स्रोत को समझने का प्रयास करें,
आप पाएंगे इस राह से गुजरते हुए आपकी नजर जरूर पड़ी थी…. मुझे पूरी आशा है कि इस संग्रह को भी आपका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होगा…. प्रकाशक श्री जीतेन्द्र पात्रो जी व प्रकाशन प्रक्रिया से जुड़ी टीम का मैं हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ। जिन्होंने बड़ी तत्परता और लगन से यह कार्य किया।





