
नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं बल्कि कर्तव्यहीनता है।
द इंडियन एक्सप्रेस में छपे ओपिनियन एडिटोरियल (op-ed) में सोनिया गांधी ने कहा कि भारत का जवाब न देना इस दुखद घटना को चुपचाप मंजूरी देने का इशारा है।
सोनिया गांधी ने कहा कि चल रही बातचीत के बीच एक मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या आज के इंटरनेशनल रिश्तों में एक बड़ी दरार दिखाती है। फिर भी, इस घटना के सदमे के अलावा जो बात उतनी ही साफ तौर पर सामने आती है, वह है नई दिल्ली की चुप्पी।
सोनिया गांधी ने और क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, “शुरू में यूएस-इजरायल के बड़े हमले को नजरअंदाज करते हुए प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने यूएई पर ईरान के जवाबी हमले की बुराई करने तक ही खुद को सीमित रखा, लेकिन उससे पहले की घटनाओं के बारे में कुछ नहीं बताया।
बाद में उन्होंने अपनी ‘गहरी चिंता’ के बारे में छोटी-मोटी बातें कीं और ‘बातचीत और डिप्लोमेसी’ की बात की, जो कि इजरायल और यूएस के बिना उकसावे के बड़े हमलों से पहले ठीक यही चल रहा था।”
भारत की विदेश नीति पर जताया संदेह
सोनिया गांधी ने भारत की विदेश नीति की दिशा पर संदेह जताया। उन्होंने कहा, “जब किसी विदेशी नेता की टारगेटेड किलिंग से हमारे देश की तरफ से संप्रभुता या अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई साफ बचाव नहीं होता और निष्पक्षता को छोड़ दिया जाता है तो इससे हमारी विदेश नीति की दिशा और भरोसे पर गंभीर शक पैदा होता है।”
पीएम मोदी के इजरायल दौरे का जिक्र
उन्होंने ईरान पर हमलों से ठीक पहले पीएम मोदी के इजरायल दौरे का भी जिक्र किया और “बिना किसी नैतिक स्पष्टता के भारत के हाई-प्रोफाइल राजनीतिक समर्थन” पर चिंता जताई।
सोनिया गांधी ने कहा, “टाइमिंग की वजह से बेचैनी और बढ़ गई है। हत्या से मुश्किल से 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इजरायल के दौरे से लौटे थे, जहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के लिए साफ तौर पर अपना समर्थन दोहराया था, जबकि गाजा लड़ाई में आम लोगों की मौत को लेकर दुनिया भर में गुस्सा है।”
उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब ग्लोबल साउथ के ज्यादातर देशों के साथ-साथ बड़ी ताकतों और BRICS में भारत के पार्टनर जैसे रूस और चीन ने दूरी बनाए रखी है, भारत का बिना किसी नैतिक स्पष्टता के हाई-प्रोफाइल राजनीतिक समर्थन एक साफ और परेशान करने वाला बदलाव है।” सोनिया गांधी ने बजट सेशन के दूसरे हिस्से में सरकार की चुप्पी पर चर्चा की भी मांग की।





