ईरान के पास अमेरिका का एक और युद्धपोत तैनात, ट्रंप बोले- समझौता नहीं हुआ तो पड़ेगी जरूरत

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि उन्होंने ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की कोशिशों के बीच मध्य पूर्व में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हो पाता है तो इसकी जरूरत पड़ेगी।

दुनिया का सबसे बड़े विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को कैरेबियन सागर से मध्य पूर्व भेजा जा रहा है। यह पहले से क्षेत्र में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ मौजूद गाइडेड-मिसाइल विध्वंसकों के साथ जुड़ जाएगा। लिंकन बीते दो सप्ताह से अधिक समय से क्षेत्र में मौजूद है।

विमानवाहक युद्धपोत की तैनाती से क्या बढ़ेगा ईरान पर दबाव?

ट्रंप ने व्हाइट हाउस से उत्तर कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग के लिए रवाना होते समय कहा कि विमानवाहक पोत जल्द ही रवाना होगा।

उन्होंने इस सप्ताह ईरान को चेतावनी दी थी कि समझौता न होने की स्थिति ‘बहुत दर्दनाक’ हो सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी।

इस बीच खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले से क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र पहले से तनाव में है।

ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों के लिए 40वें दिन की शोक सभाएं शुरू हो रही हैं, जिससे सरकार पर आंतरिक दबाव भी बढ़ रहा है।

हाल ही में अमेरिकी बलों ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया था, जो लिंकन के करीब पहुंचा था। उसी दिन ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक अमेरिकी ध्वज वाले जहाज को रोकने की कोशिश की थी।

मध्य-पूर्व में अमेरिका के दो खतरनाक युद्धपोत तैनात यूएसएस फोर्ड को पिछले साल अक्टूबर में भूमध्य सागर से कैरेबियन भेजा गया था, जहां वह वेनेजुएला से जुड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी का हिस्सा था।

अब इसे दोबारा तैनात किया जा रहा है। अमेरिकी दक्षिणी कमान ने कहा है कि बलों की तैनाती में बदलाव के बावजूद पश्चिमी गोलार्ध में उनकी परिचालन क्षमता प्रभावित नहीं होगी।

इससे पहले ट्रंप ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी लंबी बातचीत की थी। इसके बाद उन्होंने ईरान के साथ वार्ता जारी रखने पर जोर दिया।

नेतन्याहू चाहते हैं कि किसी भी समझौते में ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करे। साथ ही हमास और हिजबुल्लाह जैसे समूहों का समर्थन बंद करे।

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