
वाराणसी। सृष्टि के प्रत्यक्ष संचालक, ऊर्जा के स्रोत भगवान भाष्कर ने अपनी राहें बदल लीं। बुधवार की रात्रि 9:39 बजे वे धनु से मकर राशि में प्रवेश कर गए। सूर्य के राशि परिवर्तन से होने वाली संक्रांति को सनातन धर्मावलंबी मकर संक्रांति के रूप में उल्लासपूर्वक गुरुवार को मनाएंगे।
काशी में गंगा व प्रयागराज मेें त्रिवेणी संगम में संक्रांति स्नान के लिए रात से ही आस्थावानों की भीड़ जुटने लगी थी। आस्थावानों को गुरुवार को दोपहर 1:58 बजे तक स्नान-दान का पुण्यकाल मिलेगा। इसके साथ ही घर-घर में खिचड़ी बनेगी।
भक्त बाबा विश्वनाथ, माता अन्नपूर्णा समेत सभी देवालयों में देव विग्रहों को खिचड़ी का भोग लगाएंगे। ब्राह्मणों, याचकों व दरिद्र नारायण को तिल, गुड़, कंबल, लाई-च्यूड़ा व खिचड़ी का दान करेंगे।
अनेक स्थानों पर स्वयंसेवी संस्थाओं व मंदिर समितियों के लोगों द्वारा खिचड़ी का भंडारा भी आयोजित होगा।खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन होंगे।
लोग खिचड़ी, तिल-गुड़ से बने व्यंजनों का स्वाद चखेंगे और एक-दूसरे को भेंट करने के साथ ही बहू-बेटियों को खिचड़ी भेजी जाएगी।





