
मुंबई। फिल्म की शुरुआत में एक संवाद है कि ‘भगवा वो ध्वज है जिसके तले शिवाजी महाराज ने हिंदुओं को एकजुट किया।’ यही भगवा ध्वज बालक केशव बलिराम हेडगेवार के मन में राष्ट्रभाव की लौ प्रज्वलित करता है।
आगे चलकर यही प्रेरणा उन्हें 27 सितंबर 1925, विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना की ओर ले जाती है। संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष के अवसर पर बनी फिल्म ‘शतक’ (Shatak) एक वैचारिक और ऐतिहासिक यात्रा को परदे पर उतारने का प्रयास है।
निर्माता वीर कपूर और निर्देशक आशीष मल्ल की यह फिल्म संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और उनके विचारों पर केंद्रित है।
फिल्म का मूल उद्देश्य संघ की उत्पत्ति, उसकी कार्यप्रणाली और उसके विस्तार की प्रक्रिया को दर्शकों तक पहुंचाना है।
डॉ. हेडगेवार संघ के पहले सरसंघचालक बने और उन्होंने संगठन को सक्रिय राजनीति से दूर रखते हुए सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में कार्य करने की दिशा दी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से निर्मित इस फिल्म में हेडगेवार के बचपन से लेकर उनके वैचारिक विकास तक की घटनाओं को तेज गति से प्रस्तुत किया गया है।
प्लेग के कारण माता-पिता के निधन के बाद नागपुर के प्रभावशाली नेता डॉ. बी. एस. मुंजे का संरक्षण, स्कूल से ‘वंदेमातरम्’ बोलने पर निष्कासन, मेडिकल शिक्षा के लिए कोलकाता प्रवास और वहां क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति से जुड़ाव, ये सभी प्रसंग उनके व्यक्तित्व की दृढ़ता को रेखांकित करते हैं।





