‘चीन से रहें सावधान, कभी भी कर सकता है हमला’, अमेरिका ने भारत को किया अलर्ट

वाशिंगटन। जब पूरी दुनिया की निगाहें वर्तमान में ताइवान पर टिकी हैं, तो वहीं एक पूर्व अमेरिकी मरीन इंटेलिजेंस अधिकारी ग्रांट न्यूशम ने भारत को लेकर एक चौंकाने वाली चेतावनी दी है।

उनका मानना है कि ताइवान के शोर के बीच चीन किसी अन्य देश, विशेष रूप से भारत पर हमला कर सकता है। उन्होंने भारत को चीन के इरादों पर भरोसा न करने और हर समय सतर्क रहने की सलाह दी है।

पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने भारत को चीन से किया सतर्कपेंटागन की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए, जिसमें 2049 तक चीन के ‘कायाकल्प’ की रणनीति का जिक्र है, न्यूशम ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग PLA (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) में किए गए हालिया बदलावों को परखने के लिए किसी मोर्चे पर युद्ध का सहारा ले सकते हैं।

न्यूशम ने कहा चीन 2049 तक खुद को वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। ताइवान महज एक ‘छलावा’ हो सकता है।

आपको हमेशा वहां देखना चाहिए जहां बाकी सबकी नजरें नहीं हैं। जब पूरा ध्यान ताइवान पर केंद्रित हो, तो आपको अन्य संभावित ठिकानों पर नजर रखनी चाहिए। चीन की पूरी व्यवस्था, पीआर (पब्लिक रिलेशंस) रणनीति पूरी तरह से धोखे पर आधारित है।

ताइवान के नाम पर दुनिया को उलझाकर चीन भारत, दक्षिण कोरिया, दक्षिणी जापान या फिलीपींस जैसे क्षेत्रों में अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर सकता है। भारत निश्चित रूप से चीन की उस सूची में शीर्ष पर है जहां वह चौंकाने वाली कार्रवाई कर सकता है।’

गलवन का उदाहरण

चीनी सेना की तैयारीअक्सर यह तर्क दिया जाता है कि चीनी सेना (पीएलए) ने दशकों से कोई बड़ा युद्ध नहीं लड़ा है और वह ‘अनटेस्टेड’ (अपरिक्षित) है।

हालांकि, न्यूशम ने इस धारणा को खारिज करते हुए लद्दाख के गलवन का उदाहरण दिया।उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना के साथ आमने-सामने की हिंसक झड़प की थी, जिसमें चीन को भारी नुकसान झेलना पड़ा था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन भले ही ‘शांति की बीमारी’ की बात करता हो, लेकिन वे लगातार कठोर प्रशिक्षण ले रहे हैं।

भारत-अमेरिका संबंधों में गोर की भूमिका अहम

भारत और अमेरिका द्वारा व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की घोषणा के एक दिन बाद न्यूशम ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है।

उन्होंने कहा कि गोर राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी रहे हैं और राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक बड़ा संकेत है।

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