सेम डाइट, फिर भी कम रिजल्ट; क्यों पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए वजन घटाना है ज्यादा मुश्किल?

नई दिल्ली। आपने देखा होगा कि एक जैसी डाइट या एक्सरसाइज करने के बावजूद अक्सर पुरुषों का वजन आसानी से कम हो जाता है, लेकिन महिलाओं को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

महिलाओं के लिए यह स्थिति निराश करने वाली हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसका कारण महिलाओं की बायोलॉजी को बताते हैं। दरअसल, महिलाओं और पुरुषों की बायोलॉजी में अंतर होता है, जिसकी वजह से महिलाओं को वजन कम करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

शरीर की बनावट

पुरुषों और महिलाओं के शरीर की बनावट में अंतर होता है। आमतौर पर महिलाओं के शरीर में फैट ज्यादा और मांसपेशियां कम होती हैं। महिलाओं का मेटाबॉलिज्म काफी हद तक हमारी मांसपेशियों पर निर्भर करता है।

मांसपेशियों की कमी के कारण महिलाओं का बेसिक मेटाबॉलिक रेट कम होता है, जिसका मतलब है कि आराम करते समय उनका शरीर पुरुषों के मुकाबले कम कैलोरी जलाता है।

प्रेग्नेंसी

महिलाओं को अपने जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर हार्मोनल बदलावों का सामना करना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के दौरान वजन और शरीर का फैट बढ़ना स्वाभाविक है, जो बच्चे के जन्म के बाद भी बनी रह सकती है।

नए माता-पिता के लिए पूरी नींद और एक्सरसाइज के लिए समय निकालना मुश्किल होता है, जो वजन घटाने के लिए जरूरी हैं। हालांकि, ब्रेस्ट फीडिंग कराने से कैलोरी जलती है, जो वजन घटाने में सहायक हो सकती है।

मेनोपॉज

इसके बाद आता है मेनोपॉज का स्टेज। इस दौरान हार्मोन की कमी और धीमे मेटाबॉलिज्म के कारण वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है, खासकर पेट के हिस्से में। उम्र के साथ मांसपेशियों का कम होना भी पहले जैसा वजन बनाए रखना मुश्किल बना देता है।

हार्मोनल इंबैलेंस

महिलाओं में हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या काफी आम है। पीसीओएस जैसी स्थिति करीब 5% से 10% महिलाओं को प्रभावित करती है, जिससे वजन घटाना बहुत मुश्किल हो जाता है और पीरियड्स में अनियमितता आती है।

इसके अलावा कुशिंग सिंड्रोम, हाशिमोटो रोग और हाइपोथायरायडिज्म जैसी बीमारियां भी महिलाओं में ज्यादा पाई जाती हैं, जो हार्मोनल इंबैलेंस पैदा कर वजन बढ़ाने का कारण बनती हैं।

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