
तेहरान। इस्राइल और अमेरिका के साथ युद्ध की वजह से ईरान में 82,000 से ज्यादा इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक ईरान में 1,900 से अधिक और लेबनान में 1,100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इस्राइल में 18 लोगों की जान गई है।
ईरान और इस्राइल के बीच जारी संघर्ष शुक्रवार को और तेज हो गया। ईरान के सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को बताया की कि देश के परमाणु ठिकानों पर हमले किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, एक बड़े पानी के संयंत्र और येलोकैक उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया गया।
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने बताया कि अराक के शाहिद खोंदाब में स्थित एक भारी पानी के संयंत्र और यज्द प्रांत के अर्दकान येलोकैक प्लांट पर हमला हुआ। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ और रेडिएशन का खतरा भी नहीं है।
इस्राइल ने दी सैन्य कार्रवाई तेज करने की धमकी यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस्राइल ने तेहरान के खिलाफ अपने अभियान को और तेज और व्यापक करने की चेतावनी दी थी।
इस्राइल की सेना ने कहा कि उसने तेहरान के अंदर बैलिस्टिक मिसाइल और हथियार निर्माण से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। इसके साथ ही पश्चिमी ईरान में मिसाइल लॉन्चर और स्टोरेज साइट्स को भी निशाना बनाया।
खाड़ी देशों तक पहुंचा ईरान युद्ध
ईरान संघर्ष का दायरा खाड़ी देशों तक फैल चुका है। सऊदी अरब ने बताया कि उसने राजधानी रियाद की ओर बढ़ रहे मिसाइल और ड्रोन को मार गिराया।
कुवैत के बंदरगाहों को भी हमलों में नुकसान पहुंचा है। इस बीच लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हमले हुए, जिनमें दो लोगों की मौत हो गई।
होर्मुज के बंद होने से गहराया वैश्विक संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव वैश्विक चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
ईरान द्वारा इस मार्ग पर नियंत्रण के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। तेल की कीमतें बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जबकि वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है।
इस बीच कई देशों के राजनयिक अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता कराने की कोशिश में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी इस मुद्दे पर बंद कमरे में बैठक करने जा रही है।





