
नई दिल्ली। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये की लागत के सैन्य हार्डवेयर की खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें सेना, वायु सेना और तटरक्षक बल के लिए आधुनिक उपकरण शामिल हैं।
इस खरीद में एयर डिफेंस सिस्टम, धनुष तोप, एस-400 मिसाइल प्रणाली, मध्यम परिवहन विमान, दूर से नियंत्रित हमलावर विमान और सुखोई-30 के इंजन कलपुर्जों की ओवरहाल शामिल है।
भारतीय सेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, आर्मर्ड पियर्सिंग टैंक एम्यूनिशन, उच्च क्षमता के रेडियो रिले, धनुष गन सिस्टम और रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम की खरीद की मंजूरी दी गई है।
एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम रियल-टाइम में वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग क्षमता प्रदान करेगा। जबकि, उच्च क्षमता वाला रेडियो रिले भरोसेमंद और त्रुटि-रहित संचार सुनिश्चित करेगा।
धनुष गन सिस्टम’ से तोपखाने की क्षमता बढ़ेगी और सभी क्षेत्रों में लंबी दूरी के लक्ष्यों को अधिक प्रभावी और सटीक ढंग से निशाना बनाया जा सकेगा।
‘रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम’ सैन्य इकाइयों को निगरानी की क्षमता देगा और ‘आर्मर्ड पियर्सिंग टैंक एम्यूनिशन’ टैंक रोधी हथियारों की क्षमता को बढ़ाएगा।
भारतीय वायु सेना के लिए मध्यम परिवहन विमान, लंबी दूरी की सतह-से-वायु मिसाइल प्रणाली एस-400, दूर से नियंत्रित हमलावर विमान और सुखोई-30 एयरो इंजन के कलपुर्जों की मरम्मत और ओवरहाल (इंजन के सभी हिस्सों की पूरी तरह जांच करना, खराब या घिसे हुए हिस्सों को बदलना और उसे फिर से पूरी क्षमता के साथ चलाने के योग्य बनाना) के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं।
मध्यम परिवहन विमान के शामिल होने से एएन-32 और आईएल-76 के पुराने परिवहन बेड़े को बदलने से वायु सेना की रणनीतिक, सामरिक हवाई परिवहन की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
एस-400 प्रणाली दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई हमलों को रोकने में मदद करेगी, जबकि दूर से नियंत्रित हमलावर विमान हमले और समन्वित हवाई संचालन करने के साथ-साथ गुप्त खुफिया, निगरानी और पहचान कार्यों में सक्षम होगा।
सुखोई-30 के एयरो इंजन और उसके कलपुर्जों की पूरी मरम्मत और जांच (ओवरहाल) से विमान की सेवा अवधि बढ़ेगी और वायु सेना की संचालन की आवश्यकताएं पूरी होंगी।





