‘क्या मैं सफल हो पाऊंगा?’, संजू सैमसन को खुद पर होने लगा था शक; मैच के बाद किए कई खुलासे

कोलकाता। संजू सैमसन की नाबाद 97 रनों की पारी की बदौलत भारतीय टीम ने टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 के आखिरी मैच में वेस्‍टइंडीज को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्‍की की। दूसरे सेमीफाइनल में 5 मार्च को भारत का सामना इंग्‍लैंड से होगा।

भारतीय टीम को अगर सेमीफाइनल का टिकट कटाना था तो उन्‍हें हर हाल में वेस्‍टइंडीज को मात देनी थी। यह मैच भारत के लिए किसी वर्चुअल नॉकआउट से कम नहीं था।

ऐसे में विकेटकीपर बल्लेबाज़ संजू सैमसन ओपनर के रूप में संकटमोचक बनकर उतरे और 97 रनों की बहुमूल्य पारी खेलकर नाबाद लौटे। उन्‍हें प्‍लेयर ऑफ द मैच चुना गया। टूर्नामेंट की शुरुआत में बेंच पर बैठे रहने वाले संजू ने कई खुलासे किए।

इसी दिन का इंतजार था

संजू सैमसन ने कहा, “मुझे लगता है कि जिस दिन से मैंने खेलना शुरू किया, देश के लिए खेलने का सपना देखा, यही वो दिन था जिसका मैं इंतजार कर रहा था।

मेरा सफर हमेशा उतार-चढ़ावों से भरा रहा है, लेकिन मैंने हमेशा खुद पर शक किया। सोचा कि क्या होगा, क्या मैं सफल हो पाऊंगा? लेकिन मैंने विश्वास बनाए रखा।”

भगवान का आभार जताया

उन्‍होंने कहा, “मैं भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने आज मुझे यह आशीर्वाद दिया है। इसलिए मैं बहुत खुश हूं।

मुझे लगता है कि इसीलिए मैं इतने लंबे समय से इस फॉर्मेट में खेल रहा हूं। मैंने लगभग 10 से 12 साल आईपीएल खेला है और पिछले 10 सालों से देश के लिए खेल रहा हूं।”

कोहली-रोहित से सीख रहा था

संजू ने कहा, “पिछले विश्‍व कप में मैं खेल नहीं रहा था, बल्कि डगआउट से देख रहा था। विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे महान खिलाड़ियों से सीख रहा था।

मुझे लगता है कि उन्हें देखना, सीखना और यह देखना बहुत जरूरी है कि वे क्या कर रहे थे। मुझे लगता है कि इससे मुझे काफी मदद मिली।

मेरे अनुभव के आधार पर मैंने शायद 50-60 मैच ही खेले हैं, लेकिन मैंने लगभग 100 मैच देखे हैं और मैंने देखा है कि महानतम खिलाड़ी कैसे मैच खत्म करते हैं और वे मैच के अनुसार अपने खेल में कैसे बदलाव करते हैं।”

पूरा फोकस बड़े स्‍कोर पर था

विकेटकीपर बल्‍लेबाज ने कहा, “मुझे लगता है कि पिछले मैच में हम पहले बल्लेबाजी कर रहे थे, इसलिए सारा ध्यान एक बड़ा स्कोर बनाने पर था। इसलिए मैं पहली गेंद से ही बड़ा स्कोर बनाना चाहता था। लेकिन यह मैच बिल्कुल अलग था।

जैसे ही मैंने थोड़ा और तेज खेलने की कोशिश की, विकेट गिरने लगे। ऐसे में मैं पार्टनरशिप करना चाहता था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कुछ खास कर पाऊंगा।

मैं बस अपने रोल पर ध्यान दे रहा था और एक-एक गेंद पर खेल रहा था। मुझे लगता है कि यह मेरे जीवन के सबसे बेहतरीन दिनों में से एक है।”

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